मध्य पूर्व तनाव के बीच चीन की पहल: शी जिनपिंग ने पेश किया चार सूत्रीय शांति फॉर्मूला

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मध्य पूर्व तनाव के बीच चीन की पहल: शी जिनपिंग ने पेश किया चार सूत्रीय शांति फॉर्मूला

शी जिनपिंग बीजिंग में शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करते हैं। इस दौरान चीन पश्चिम एशिया के संकट पर चार सूत्रीय प्रस्ताव सामने रखता है। यह पहल ऐसे समय आती है जब US और ईरान के बीच बातचीत टूटने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ता है।

इसके बाद, शी जिनपिंग स्पष्ट रोडमैप रखते हैं। वे शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर देते हैं। साथ ही, वे हर देश की संप्रभुता के सम्मान की बात करते हैं। वे विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन को जरूरी बताते हैं। अंत में, वे अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की अपील करते हैं। वे साफ कहते हैं कि दुनिया चुनिंदा नियमों से नहीं चल सकती।

इसी बीच, जमीनी हालात तनावपूर्ण बने रहते हैं। ईरान होरमुज जलडमरूमध्य में कड़े कदम उठाता है और कुछ जहाजों की आवाजाही रोकता है। इसके जवाब में अमेरिका समुद्री दबाव बढ़ाता है और ईरानी बंदरगाहों पर सख्ती दिखाता है। इस टकराव से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ता है। ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है।

उधर, चीन संतुलित रुख अपनाने की कोशिश करता है। वह ईरान के साथ अपने आर्थिक रिश्ते बनाए रखता है, खासकर तेल आयात में। इसके बावजूद, वह खुद को सीधे सैन्य समर्थन से दूर दिखाता है। इस रणनीति से बीजिंग एक तटस्थ मध्यस्थ की छवि गढ़ता है, जबकि अपने हित भी सुरक्षित रखता है।

साथ ही, वैश्विक राजनीति का असर साफ दिखता है। व्लादिमीर पुतिन की सरकार ईरान के साथ करीबी सहयोग रखती है। वहीं, ईरान रूस को ड्रोन समर्थन देता है और चीन को तेल सप्लाई करता है। यह त्रिकोणीय संबंध क्षेत्रीय समीकरणों को जटिल बनाता है।

इसके अलावा, कूटनीतिक हलचल तेज होती है। शी जिनपिंग अगले महीने डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की तैयारी करते हैं। इस बैठक पर दुनिया की नजरें टिकती हैं। विश्लेषक मानते हैं कि यह बातचीत आगे की दिशा तय कर सकती है।

अंत में, चीन का चार सूत्रीय फॉर्मूला खुद को शांति के पक्षधर के रूप में पेश करता है। अब सबकी नजर इस बात पर रहती है कि क्या यह पहल जमीन पर तनाव कम कर पाती है या नहीं।


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