स्व आधारित भारत ही विकास का मार्ग-बनवीर सिंह
आरएसएस के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर सिंह जी ने ‘स्व’ (अपना मूल, अपनी संस्कृति और मातृभाषा) पर जोर देते हुए कहा है कि अपने ‘स्व’ को भूलने के कारण ही समाज में भटकाव और समस्याएं आईं।उन के अनुसार, जब तक हम अपनी पहचान (हम कौन हैं और हमारी प्रकृति क्या है) को नहीं पहचानते, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। ‘स्व’ आधारित भारत ही विकास और प्रगति का सर्वोत्तम मार्ग है।उन्होने कहा कि वास्तविक प्रगति के लिए अपनी जड़ों और मातृभाषा से जुड़े रहना अनिवार्य है। उन्होंने सभी से अपनी मातृभाषा में बात करने और अपने घर में कम से कम उसी का उपयोग करने का आग्रह किया है।
वह केशव भवन चंडीगढ़ में पुस्तक “स्व से साक्षात्कार ” के पंजाबी अनुवाद “ਸਵੈ” ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ जिसमे पूजनीय सर संघचालक डॉ मोहन भागवत जी, अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह अरुण कुमार जी, प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जेनंदकुमार जी, उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर सिंह जी का स्व: के विषय पर सम्बोधन हैं के लोकार्पण कार्यक्रम में बोल रहे थे!यह अनुवाद विद्या भारती पंजाब के संपर्क विभाग द्वारा किया गया है!इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या भारती पंजाब के महामंत्री संदीप धुरिया जी ने की!उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक बनें, लेकिन पश्चिमी विचारों के गुलाम न बनें।
मुख्य अतिथि के रूप में निर्मलजीत सिंह कलसी जी (IAS retd ) रहे!उन्होने कहा कि आधुनिक विकास (विज्ञान और तकनीक) को अपनाना जरूरी है, लेकिन पश्चिमीकरण की अंधी दौड़ में अपनी संस्कृति और जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। कार्यक्रम में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के चेयरमैन मनमोहन सिंह जी (IPS retd ), गौरव टंडन जी (कुलसचिव IIIT una), प्रेम शर्मा जी (सेवानिवृत जॉइंट डायरेक्टर वित्त विभाग पंजाब ), संपर्क विभाग के कार्यकर्ता रमेश अरोड़ा जी, प्रवीण गुप्ता जी आदि अनेक चिंतक मौजूद रहे!
