नासिक का शांत औद्योगिक इलाका एक बड़े विवाद से हिलता है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़े BPO में गंभीर आरोप सामने आते हैं। पुलिस अब तक 9 FIR दर्ज करती है और 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार करती है। इनमें 7 पुरुष और 1 महिला मैनेजर शामिल हैं। जांच में यौन शोषण, दबाव और संगठित गतिविधियों के संकेत मिलते हैं।
इसके बाद, पुलिस जांच की परतें खोलती है। अधिकारियों को फरवरी की शुरुआत में सूचना मिलती है। फिर, वे गुप्त ऑपरेशन शुरू करते हैं। 6 महिला पुलिसकर्मी कर्मचारियों के रूप में 40 दिन तक काम करती हैं। वे मीटिंग, कॉल और व्यवहार पर नजर रखती हैं। उनकी रिपोर्ट शुरुआती आरोपों को मजबूत करती है और कार्रवाई का आधार बनती है।
इसी दौरान, 23 वर्षीय कर्मचारी 26 मार्च को देवळाली थाने में शिकायत दर्ज कराती है। वह एक वरिष्ठ सहयोगी पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाती है। इसके बाद 8 और कर्मचारी सामने आते हैं। वे यौन, मानसिक और धार्मिक उत्पीड़न की बात रखते हैं। पुलिस कमिश्नर Sandeep Karnik कहते हैं कि आरोपी संगठित तरीके से काम करते हैं और जूनियर स्टाफ पर दबाव डालते हैं।
उधर, Nida Khan को लेकर विवाद बढ़ता है। पुलिस उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बताती है। लेकिन परिवार इन दावों को खारिज करता है। परिवार कहता है कि नीदा मुंबई में है और फरार नहीं है। वे यह भी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर उनकी प्रोफाइल को गलत तरीके से पेश किया गया। परिवार के अनुसार, वह HR नहीं बल्कि सेल्स टीम में टेली-कॉलर थी। अब उनका वकील अग्रिम जमानत की तैयारी करता है।
इस बीच, जमीनी हालात तनावपूर्ण बनते हैं। कर्मचारी डर और गुस्से के बीच काम करते हैं। कुछ लोग बताते हैं कि शिकायत करने पर उन्हें गंभीरता नहीं मिलती। एक पीड़िता के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसकी शिकायत को हल्के में लिया। इससे कंपनी की आंतरिक व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
आगे, जांच का दायरा बढ़ता है। कुछ शिकायतों में धर्म बदलने के दबाव की बात सामने आती है। पुलिस व्हाट्सऐप चैट्स की जांच करती है, जहां विदेश में नौकरी के प्रस्ताव की चर्चा मिलती है। इसी आधार पर एजेंसियां संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी खंगालती हैं। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) और अन्य इकाइयां जांच में मदद करती हैं।
साथ ही, कंपनी कार्रवाई करती है। TCS 7 कर्मचारियों को नौकरी से निकालती है और आंतरिक जांच शुरू करती है। चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन मामले को गंभीर बताते हैं। फिर भी, यह सवाल बना रहता है कि पीड़ित पहले शिकायत क्यों नहीं कर पाए।
अंत में, मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर होती है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) भी जांच समिति बनाता है। अब सभी की नजर जांच के नतीजों और न्याय की दिशा पर टिकी है।