महतारी गौरव वर्ष में बदली प्रशासनिक तस्वीर, छत्तीसगढ़ के 10 जिलों में महिलाओं ने संभाली कमान
रायपुर – छत्तीसगढ में इस समय सरकारी दफ्तरों से लेकर जिला मुख्यालयों तक एक बड़ा बदलाव साफ दिखने लगा है। अब कई जिलों में महिलाएं प्रशासन की सबसे अहम कुर्सी संभाल रही हैं। कानून व्यवस्था की निगरानी हो या सरकारी योजनाओं की समीक्षा, महिला अफसर अब हर मोर्चे पर सीधे नेतृत्व करती नजर आ रही हैं। इसी के साथ राज्य सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का संकेत भी दे दिया है।
दरअसल, राज्य सरकार इस साल को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मना रही है। इसी अभियान के बीच हाल में 43 IAS अधिकारियों के तबादले हुए। इसके बाद सरकार ने कई जिलों की जिम्मेदारी महिला अधिकारियों को सौंपी। अब राज्य के 33 जिलों में से 10 जिलों में महिला कलेक्टर काम संभाल रही हैं।
ग्रामीण इलाकों में भी इसका असर दिखने लगा है। जिला मुख्यालयों में होने वाली जनदर्शन बैठकों, विकास कार्यों की समीक्षा और कानून व्यवस्था की बैठकों में अब महिला अफसर नेतृत्व करती नजर आती हैं। स्थानीय लोग भी इसे प्रशासनिक सोच में बदलाव के तौर पर देख रहे हैं।
सरकार ने सूरजपुर जिले की जिम्मेदारी रेना जमील को दी। वहीं बलरामपुर में चंदन संजय त्रिपाठी ने कमान संभाली। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में संतन देवी जांगड़े को जिम्मेदारी मिली। इसी तरह सारंगढ़-बिलाईगढ़ में पद्मिनी भोई को कलेक्टर बनाया गया। कोरिया जिले में भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया। पहले पुष्पा साहू की नियुक्ति हुई, लेकिन 48 घंटे के भीतर सरकार ने रोमिक्ता यादव को नई कलेक्टर बना दिया।
इसके अलावा कई जिलों में पहले से महिला कलेक्टर काम कर रही थीं। नारायणपुर में नम्रता जैन, कोंडागांव में नुपूर राशि पन्ना, बेमेतरा में प्रतिष्ठा ममगाई, बालोद में दिव्या उमेश मिश्रा और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में लीना कमलेश मंडावी प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
प्रशासनिक जानकार मानते हैं कि कलेक्टर जिले में सरकार का सबसे बड़ा चेहरा होता है। कलेक्टर कानून व्यवस्था देखता है, योजनाओं की निगरानी करता है और जनता की शिकायतों पर फैसला लेता है। ऐसे में इन पदों पर महिलाओं की बढ़ती संख्या को सरकार की बड़ी रणनीतिक पहल माना जा रहा है।
यह बदलाव केवल जिलों तक सीमित नहीं रहा। मंत्रालय में भी महिला अफसरों का कद बढ़ा है। 1997 बैच की IAS निहारिका बारीक अब गृह विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनी हैं। राज्य गठन के बाद पहली बार किसी महिला अफसर को गृह विभाग जैसी अहम जिम्मेदारी मिली है।
इसके साथ ही ऋचा शर्मा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग संभाल रही हैं। वहीं संगीता आर को शहरी प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी मिली है। शम्मी आबिद राजस्व विभाग में सचिव बनी हैं। रीना बाबा कंगाले आबकारी और खाद्य विभाग देख रही हैं। वहीं शाहला निगार महिला एवं बाल विकास के साथ समाज कल्याण विभाग संभाल रही हैं।
सरकार ने हाल में बने कर्मचारी चयन बोर्ड की कमान भी रेणु पिल्ल को सौंपी है। लगातार बढ़ती इन नियुक्तियों ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ अब प्रशासनिक नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
