मणिपुर में रॉकेट हमला: दो बच्चों की मौत, घाटी में फिर बढ़ा तनाव

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बिष्णुपुर – मणिपुर में हिंसा एक बार फिर तेज होती दिखती है। बिष्णुपुर के मोइरांग इलाके में संदिग्ध रॉकेट या मोर्टार हमला होता है। इस हमले में दो छोटे बच्चों की मौत होती है, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो जाती है। घटना पहाड़ी और घाटी की संवेदनशील सीमा के पास होती है, जहां लंबे समय से तनाव बना रहता है।

सुबह तड़के त्रोंगलाओबी आवांग लेइकाई (Tronglaobi Awang Leikai) गांव में जोरदार धमाका होता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पास की पहाड़ियों से दागा गया प्रोजेक्टाइल एक घर पर गिरता है। यह घर एक बीएसएफ जवान का बताया जाता है, जो राज्य से बाहर तैनात है। उस समय घर में उसकी पत्नी और दोनों बच्चे मौजूद रहते हैं।

धमाका घर को बुरी तरह नुकसान पहुंचाता है। तीनों गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। स्थानीय लोग तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाते हैं। हालांकि, इलाज के दौरान दोनों बच्चों की मौत हो जाती है। मां का इलाज अभी भी जारी रहता है।

घटना के बाद गांव में डर फैलता है। लोग घरों से बाहर निकलकर हालात समझने की कोशिश करते हैं। कई परिवार बच्चों को घर के अंदर ही रखते हैं। बाजार जल्दी बंद हो जाते हैं और आवाजाही कम हो जाती है।

यह इलाका चुराचांदपुर की पहाड़ियों के पास स्थित है। इसलिए इसे पहले से संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय लोग दावा करते हैं कि पहले भी ऊंचाई से ऐसे हमले होते रहे हैं। वे कहते हैं कि हमलावर दूर से निशाना साधते हैं।

घटना के बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठता है। कुछ समूह सड़कों पर उतरते हैं और विरोध शुरू करते हैं। प्रदर्शनकारियों ने दो तेल टैंकर और एक ट्रक को आग लगा दी। ये वाहन कथित तौर पर पहाड़ी इलाकों की ओर जा रहे थे।

भीड़ मोइरांग पुलिस स्टेशन के बाहर भी जमा होती है। लोग प्रशासन पर दबाव बनाते हैं और सुरक्षा बढ़ाने की मांग करते हैं।

इसके बाद सुरक्षा बल इलाके में तैनाती बढ़ाते हैं। वे आसपास की पहाड़ियों में सर्च ऑपरेशन शुरू करते हैं। प्रशासन इलाके को हाई अलर्ट पर रखता है।

स्थानीय विधायक थोंगम शांति हमले की निंदा करते हैं। वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। वहीं, प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करता है।

मणिपुर में पिछले कई महीनों से जातीय तनाव बना रहता है। खासकर पहाड़ी और घाटी के बीच टकराव बढ़ता रहा है। ऐसे हमले हालात को और बिगाड़ते हैं।

एहतियात के तौर पर कई स्कूल बंद रहते हैं। अभिभावक बच्चों को घर में ही रखते हैं। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की तलाश में जुटती हैं, जबकि इलाके में डर और तनाव कायम रहता है।


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