तिरुवनंतपुरम – अनुमुला रेवंत रेड्डी के बयान ने सियासी हलचल बढ़ाई। फिर, पिनारयी विजयन ने तेज प्रतिक्रिया दी और सीधे जवाब दिया।
रेड्डी ने केरल सरकार पर भ्रष्टाचार और खराब प्रशासन के आरोप लगाए। उन्होंने मौजूदा दौर को “डार्क एरा” बताया। साथ ही, उन्होंने नेतृत्व पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, विजयन ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि रेड्डी गलत जानकारी पर भरोसा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केरल के सामाजिक मॉडल को समझे बिना टिप्पणी करना ठीक नहीं।
आंकड़ों के जरिए जवाब
इसके बाद, विजयन ने बहस को तथ्यों पर केंद्रित किया। उन्होंने नीति आयोग के आंकड़े सामने रखे। उन्होंने बताया कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट इंडेक्स में केरल पहले स्थान पर है, जबकि तेलंगाना छठे स्थान पर है।
उन्होंने गरीबी के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केरल ने अत्यधिक गरीबी को लगभग खत्म कर दिया। वहीं, तेलंगाना में गरीबों की हिस्सेदारी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि यही असली जमीनी तस्वीर दिखाता है।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी उन्होंने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आधिकारिक रिपोर्ट केरल को कम भ्रष्ट राज्यों में रखती है।
जमीनी असर और वेलफेयर मॉडल
इसी बीच, विजयन ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर दिया। उन्होंने उच्च साक्षरता दर और कम शिशु मृत्यु दर का हवाला दिया।
जमीनी स्तर पर, लोग बेहतर स्कूल और स्वास्थ्य सेवाएं पाते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में वेलफेयर योजनाएं असर दिखाती हैं। विजयन ने इन उदाहरणों से अपनी सरकार का बचाव किया।
उन्होंने तेलंगाना में वेतन और पेंशन में देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
नीतियों पर विरोधाभास
फिर, विजयन ने एक बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि 2025 में तेलंगाना के अधिकारी केरल आए थे। उन्होंने “एंटे भूमि” प्रोजेक्ट का अध्ययन किया था।
उन्होंने पूछा कि जब तेलंगाना सरकार सीखना चाहती है, तो सार्वजनिक मंच पर आलोचना क्यों करती है। उन्होंने इसे राजनीतिक विरोधाभास बताया।
बड़ा सियासी संदर्भ
दूसरी तरफ, रेड्डी ने केरल पर विकास परियोजनाएं रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्र सरकार, जिसका नेतृत्व नरेन्द्र दामोदरदास मोदी करते हैं, और राज्य के बीच संबंधों पर भी सवाल उठाए।
विजयन ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केंद्र की नीतियों का प्रभावी विरोध नहीं करती।
बढ़ती बहस
आखिर में, यह टकराव एक बड़े सवाल को सामने लाता है। क्या शासन का मूल्यांकन आंकड़ों से होगा या राजनीतिक धारणा से?
फिलहाल, दोनों नेता अपने रुख पर कायम हैं। विजयन विकास मॉडल पर भरोसा दिखाते हैं। वहीं, रेड्डी राजनीतिक जवाबदेही पर जोर देते हैं। यह बहस आगे भी जारी रहने के संकेत देती है।