एडमंटन – कनाडा में 22 वर्षीय भारतीय छात्र बीरेंद्र सिंह की हत्या मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। जांच एजेंसियों ने नस्लीय हमले की आशंका को खारिज किया। साथ ही, पुलिस ने दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि की। इस कदम ने मामले को नया मोड़ दिया।
सबसे पहले, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना पक्ष साफ किया। अधिकारी जॉन ब्राउन ने कहा कि जांच टीम ने हर एंगल की गहराई से जांच की। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना में नस्लीय मकसद नहीं दिखता। इस बयान ने पहले से चल रही चर्चाओं को चुनौती दी।
इसके बाद, पुलिस ने कार्रवाई तेज की। अधिकारियों ने 18 वर्षीय जिमी गैसनर को पहले ही गिरफ्तार किया था। अब उन्होंने 23 वर्षीय ड्योन लिबसेकल को भी पकड़ा। जांच के अनुसार, दोनों आरोपी घटना में शामिल रहे। पुलिस ने दोनों पर सेकेंड-डिग्री मर्डर का आरोप लगाया।
इस बीच, पुलिस ने घटना की जानकारी भी साझा की। 14 मार्च को दोपहर करीब 3 बजे यह वारदात हुई। एडमोंटन के पास सिंह अपने दोस्तों के साथ कार चला रहे थे। तभी एक पिकअप ट्रक उनकी गाड़ी के पास आया। इसके तुरंत बाद हमलावरों ने फायरिंग की। गोली लगने से सिंह की मौके पर मौत हुई।
ग्राउंड पर इस घटना ने लोगों को झकझोर दिया। स्थानीय समुदाय में डर और गुस्सा दोनों दिखे। कुछ संगठनों ने इसे नस्लीय हमला बताया। हालांकि, पुलिस ने इस दावे को सबूतों के आधार पर नकार दिया। इसलिए, जांच और जनभावना के बीच अंतर साफ नजर आता है।
दूसरी ओर, पुलिस अब हत्या के असली कारण की तलाश कर रही है। अधिकारी “मिस्टेकन आइडेंटिटी” यानी पहचान की गलती की संभावना पर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। वहीं, आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड सामने आए हैं। इस पहलू ने जांच को और जटिल बना दिया।
इसी दौरान, सिंह के दोस्तों ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने पहले इशारा किया और फिर गोली चलाई। एक दोस्त ने शक जताया कि रंगभेद की वजह हो सकती है। लेकिन पुलिस ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की।
पृष्ठभूमि में देखें तो सिंह तीन साल पहले कनाडा पहुंचे थे। उन्होंने पहले ब्रैम्पटन में रहना शुरू किया। बाद में वह एडमंटन आ गए। वह पढ़ाई के साथ बेहतर भविष्य की तलाश में जुटे थे। उनकी मौत ने परिवार और दोस्तों को गहरा झटका दिया।
इसके बाद, वैंकूवर में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने शोक जताया। दूतावास ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया। साथ ही, एक ऑनलाइन फंडरेजर के जरिए 25,000 कनाडाई डॉलर से ज्यादा जुटाए गए, ताकि पार्थिव शरीर भारत लाया जा सके।
अंत में, पुलिस ने कहा कि जांच अभी जारी है। अधिकारी सबूत जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील की। फिलहाल, पुलिस नस्लीय एंगल को नकारती है। लेकिन मामले के कई सवाल अभी भी जवाब मांगते हैं।