तेल के झटके और ग्लोबल तनाव से बाजार हिला, सेंसेक्स 1,500 अंक टूटा

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मुंबई – घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को तेज गिरावट के साथ शुरुआत की। शुरुआत में ही बिकवाली बढ़ी और दबाव पूरे सत्र में बना रहा। BSE सेंसेक्स 1,500 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं, निफ्टी 50 अहम स्तर के नीचे फिसल गया। निवेशकों ने तेजी से जोखिम कम किया।

सबसे पहले, कच्चे तेल की कीमतों ने बाजार को झटका दिया। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड तेजी से उछला और 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा। इस उछाल के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रहा। डॉनल्ड ट्रम्प से जुड़े बयान ने हालात और गरमाए। निवेशकों ने सप्लाई बाधित होने की आशंका जताई। इसलिए, बाजार में घबराहट बढ़ी।

इसके बाद, इसका असर भारत पर साफ दिखा। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। महंगा तेल आयात बिल बढ़ाता है। इससे व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपया कमजोर होता है। साथ ही, कंपनियों की लागत भी बढ़ती है। इसलिए, निवेशकों ने इक्विटी से दूरी बनाई।

दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली की। उन्होंने बाजार से बड़ी रकम निकाली। इससे लिक्विडिटी घटी और दबाव बढ़ा। रुपये पर भी असर पड़ा। इस वजह से बाजार की दिशा और कमजोर हुई।

ग्राउंड पर देखें तो हर सेक्टर में बिकवाली दिखी। बैंकिंग शेयरों ने सबसे ज्यादा दबाव झेला। ये शेयर विदेशी निवेश और मुद्रा उतार-चढ़ाव से जल्दी प्रभावित होते हैं। इसलिए, इनमें तेज गिरावट आई। इसके अलावा, साइक्लिकल सेक्टर भी फिसले। इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स से जुड़ी कंपनियों पर लागत बढ़ने का असर दिखा।

एविएशन सेक्टर में भी तेज गिरावट आई। महंगा एटीएफ सीधे एयरलाइन कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित करता है। इसलिए, निवेशकों ने इन शेयरों से दूरी बनाई। साथ ही, फार्मा शेयरों में भी गिरावट आई। इस ट्रेंड ने साफ किया कि निवेशक हर सेक्टर में जोखिम कम कर रहे हैं।

हालांकि, आईटी सेक्टर ने कुछ हद तक सहारा दिया। कमजोर रुपये से निर्यात आधारित कंपनियों को फायदा मिलता है। फिर भी, कुल मिलाकर बाजार पर इसका असर सीमित रहा। इसलिए, आईटी भी गिरावट को रोक नहीं सका।

इस बीच, बाजार की चौड़ाई कमजोर रही। ज्यादातर शेयर लाल निशान में दिखे। बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी गिरे। कुछ ही घंटों में निवेशकों की करीब ₹10 लाख करोड़ की संपत्ति घट गई। यह गिरावट तेज और व्यापक रही।

पृष्ठभूमि में देखें तो वैश्विक संकेत लगातार दबाव बना रहे हैं। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इससे ग्लोबल लिक्विडिटी सख्त होती है। वहीं, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत नहीं दिखते। इसलिए, अनिश्चितता बनी रहती है।

तकनीकी नजरिए से भी बाजार कमजोर दिखता है। प्रमुख स्तर टूटने से गिरावट का जोखिम बढ़ता है। अब निवेशक निचले स्तरों पर सपोर्ट तलाशते दिखते हैं। इसलिए, ट्रेडर्स सतर्क रुख अपनाते हैं।

आगे की दिशा तीन बड़े कारकों पर निर्भर करेगी। पहला, कच्चे तेल की कीमतें। दूसरा, विदेशी निवेशकों का रुख। तीसरा, रुपये की चाल। अगर ये दबाव बने रहते हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

अंत में, बाजार फिलहाल अनिश्चित दौर से गुजरता दिखता है। ग्लोबल घटनाएं घरेलू रुझान को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में निवेशक सावधानी के साथ कदम बढ़ा रहे हैं।


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