वेस्ट एशिया/वॉशिंगटन – वेस्ट एशिया संघर्ष के 33वें दिन हालात ने नया मोड़ लिया। डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने रुख में नरमी दिखाई। उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलता है, तो वह सीजफायर के लिए तैयार हैं। इस बयान ने वैश्विक कूटनीति में नई हलचल पैदा की।
सबसे पहले, सूत्रों ने एक अहम जानकारी दी। जेडी वेंस को यह संदेश मध्यस्थों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई। इससे संकेत मिला कि बैकचैनल बातचीत तेज हो रही है। ट्रंप जल्द औपचारिक संबोधन भी देंगे। इसलिए, दुनिया की नजरें अब उनके अगले कदम पर टिक गई हैं।
हालांकि, ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। अब्बास अराघची ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य पर फैसला केवल ईरान और ओमान करेंगे। इस जवाब ने दोनों पक्षों के बीच मतभेद को उजागर कर दिया।
इसी बीच, अमेरिका ने सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी। उसने USS जॉर्ज हर्बर्ट वॉकर बुश को क्षेत्र में तैनात किया। यह पोत पहले से मौजूद USS गेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन के साथ जुड़ गया। इस तैनाती ने संकेत दिया कि अमेरिका दबाव और कूटनीति दोनों साथ-साथ चला रहा है।
दूसरी ओर, ट्रंप के बयान लगातार बदलते दिखे। पहले उन्होंने शासन परिवर्तन की बात की। फिर उन्होंने परमाणु संतुलन पर जोर दिया। अब उन्होंने होरमुज खोलने को प्राथमिकता दी। इन बदलावों ने अमेरिकी रणनीति पर सवाल खड़े किए। सहयोगी देश भी स्पष्टता चाहते हैं।
इसी दौरान, नाटो सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ा। मार्को रुबियो ने गठबंधन की भूमिका पर पुनर्विचार की बात कही। इस बयान ने पश्चिमी एकता पर दबाव बढ़ाया। इसलिए, कूटनीतिक समीकरण और जटिल हो गए।
ग्राउंड पर संघर्ष का दायरा भी बढ़ गया। हूती ने नया मोर्चा खोल दिया। उन्होंने बाब अल-मन्देब क्षेत्र में गतिविधि बढ़ाई। यह मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति और शिपिंग पर खतरा मंडराने लगा।
इसके साथ ही, वैश्विक ताकतों ने शांति की पहल की। चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से सीजफायर की अपील की। उन्होंने पांच सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी रखा। यह पहल कूटनीतिक प्रयासों को नई दिशा देती है।
पृष्ठभूमि में देखें तो होरमुज और बाब-अल-मंदेब दोनों वैश्विक ऊर्जा मार्गों के केंद्र हैं। इन रास्तों से बड़ी मात्रा में तेल और व्यापार गुजरता है। इसलिए, यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया को प्रभावित करता है।
अंत में, हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं। ट्रंप का प्रस्ताव बातचीत का रास्ता खोलता है। लेकिन ईरान की सख्त प्रतिक्रिया और बढ़ता सैन्य दबाव चुनौती पैदा करता है। ऐसे में आने वाले दिन तय करेंगे कि संघर्ष कम होगा या और गहराएगा।