गुवाहाटी – असादुदीन ओवैसी ने असम की चुनावी जमीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने सीधे हिमंता बिस्वा सरमा पर हमला बोला। उन्होंने रैली के मंच से “रिग्रेसिव पॉलिटिक्स” का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने आने वाले विधानसभा चुनाव को निर्णायक मोड़ बताया।
सबसे पहले, ओवैसी ने हालिया कार्रवाइयों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात खराब दिखते हैं। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद, उन्होंने लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि नारेबाजी से बदलाव नहीं आता। इसलिए, उन्होंने वोट को सबसे बड़ा हथियार बताया।
इसके अलावा, ओवैसी ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व ही दबाव का जवाब देता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ज्यादा से ज्यादा AIUDF उम्मीदवारों को जिताएं। इससे विधानसभा में उनकी आवाज मजबूत होगी।
दूसरी ओर, उन्होंने बीजेपी के बढ़त वाले दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत अलग कहानी बताती है। उन्होंने दावा किया कि जनता में असंतोष दिखता है। इसलिए, उन्होंने चुनाव को खुला मुकाबला बताया। उन्होंने कार्यकर्ताओं में भरोसा जगाने की कोशिश की।
इस बीच, ओवैसी बुधवार को असम पहुंचे। समर्थकों ने एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए। उन्होंने पारंपरिक असमिया ‘गमछा’ पहनाकर सम्मान किया। इस स्वागत ने साफ संकेत दिया कि पार्टी अपने आधार को सक्रिय करना चाहती है।
रैली के दौरान, ओवैसी ने अपने संदेश को और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नेताओं की नहीं है। उन्होंने बदरुद्दीन अजमल का जिक्र करते हुए कहा कि असली सवाल प्रतिनिधित्व का है। उन्होंने पूछा कि आपकी आवाज कौन उठाएगा। फिर उन्होंने लोगों से अपने वोट का सही इस्तेमाल करने को कहा।
ग्राउंड पर तस्वीर मिश्रित नजर आती है। कई इलाकों में लोग रोज़गार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं। वहीं, कुछ लोग सरकारी कदमों को लेकर चिंता जताते हैं। इन मुद्दों ने चुनावी बहस को तेज कर दिया है। इसलिए, हर पार्टी अपने-अपने तरीके से मतदाताओं तक पहुंच रही है।
पृष्ठभूमि में देखें तो असम की राजनीति लगातार बदलती रही है। बीजेपी विकास और प्रशासनिक फैसलों पर जोर देती है। वहीं, विपक्ष सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व की बात उठाता है। ऐसे में ओवैसी की एंट्री मुकाबले को और धार देती है। वह खास वोट बैंक को साधने की कोशिश करते हैं।
अंत में, पूरा फोकस मतदाताओं पर टिका है। चुनाव का नतीजा उनके फैसले तय करेंगे। ओवैसी ने साफ कहा कि जनता अपने वोट से संदेश दे। अब देखना होगा कि यह अपील कितनी असर डालती है और असम की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।