नई दिल्ली/बेंगलुरु – ओरेकल ने बड़े स्तर पर छंटनी शुरू की है। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर करीब 30,000 कर्मचारियों को हटाया। इनमें से लगभग 12,000 कर्मचारी भारत से जुड़े हैं। साथ ही, सूत्रों ने संकेत दिया कि एक और छंटनी का दौर अगले एक महीने में आ सकता है।
कंपनी ने यह कदम अपने ऑपरेशन को सरल बनाने के लिए उठाया। उसने संगठन में बदलाव किए और कई पद खत्म कर दिए। कर्मचारियों को ईमेल के जरिए सूचना दी गई। कंपनी ने साफ कहा कि बदलाव के कारण कई भूमिकाएं अब जरूरी नहीं रहीं। इसी आधार पर कर्मचारियों को हटाने का फैसला लिया गया।
जमीनी स्तर पर असर काफी व्यापक दिखा। बेंगलुरु, हैदराबाद और नोएडा जैसे टेक हब में काम करने वाले हजारों कर्मचारी प्रभावित हुए। कई लोगों ने अचानक नौकरी खो दी। इससे कर्मचारियों के बीच असुरक्षा और चिंता बढ़ी।
कंपनी ने मुआवजे का एक ढांचा भी तय किया। उसने हर साल की सेवा पर 15 दिन का वेतन देने की पेशकश की। इसके अलावा नोटिस पीरियड का वेतन, छुट्टी का पैसा और ग्रेच्युटी भी शामिल की। कंपनी ने दो महीने का अतिरिक्त वेतन भी ऑफर किया। हालांकि, यह लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो स्वेच्छा से इस्तीफा देंगे।
इस पूरे मामले पर कंपनी ने सार्वजनिक बयान नहीं दिया। उसने आधिकारिक टिप्पणी से इनकार किया। फिर भी, अंदरूनी सूत्रों ने पुष्टि की कि यह कदम वैश्विक रणनीति का हिस्सा है।
पृष्ठभूमि में देखें तो ओरेकल भारत में करीब 30,000 लोगों को रोजगार देता है। वहीं, मई 2025 तक कंपनी के वैश्विक कर्मचारियों की संख्या 1.6 लाख से अधिक रही। ऐसे में यह छंटनी कंपनी की रणनीति में बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है।
इसी बीच, कुछ पूर्व कर्मचारियों ने काम के माहौल पर सवाल उठाए। एक पूर्व कर्मचारी ने लंबे काम के घंटों का मुद्दा उठाया। उसने दावा किया कि विरोध करने के बाद उसे नौकरी से बाहर किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
टेक इंडस्ट्री में हाल के समय में छंटनी का ट्रेंड बढ़ा है। कंपनियां लागत घटाने और दक्षता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। साथ ही, ऑटोमेशन और नई तकनीकें भी रोजगार संरचना को बदल रही हैं।
फिलहाल, ओरेकल का यह कदम भारत के आईटी सेक्टर के लिए चिंता बढ़ाता है। अगर दूसरा दौर शुरू होता है, तो असर और गहरा हो सकता है। ऐसे में कर्मचारी और उद्योग दोनों आने वाले समय पर नजर बनाए हुए हैं।