ट्रंप ने ईरान से यूरेनियम जब्त करने के सैन्य विकल्प पर विचार तेज किया

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वॉशिंगटन – डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य विकल्प पर विचार शुरू किया। वह अमेरिकी सैनिकों को भेजकर करीब 450 किलो समृद्ध यूरेनियम जब्त करने की योजना पर सोच रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ। हालांकि, यह कदम मौजूदा संघर्ष को और भड़का सकता है।

यह मिशन अमेरिकी सैनिकों को कई दिनों तक ईरान की जमीन पर रख सकता है। इसलिए, रणनीतिक और सुरक्षा जोखिम दोनों पर चर्चा चल रही है। ट्रंप लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की बात करते रहे हैं। इसी लक्ष्य के तहत वह इस विकल्प को खुला रखे हुए हैं। साथ ही, उन्होंने कूटनीतिक रास्ते को भी पूरी तरह बंद नहीं किया।

वॉशिंगटन में हलचल तेज हो गई है। पेंटागन में लगातार बैठकों का दौर जारी है। सैन्य अधिकारी अलग-अलग ऑप्शन पर काम कर रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञ जोखिम का आकलन कर रहे हैं। कई विश्लेषक मानते हैं कि ऐसा कदम तुरंत जवाबी कार्रवाई को जन्म दे सकता है।

मैदान में भी तैयारी दिख रही है। अमेरिकी बल अलर्ट मोड पर हैं। कमांडर त्वरित तैनाती योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। मरीन यूनिट्स और एयरबोर्न डिवीजन को तैयार रखा गया है। हालांकि, अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।

परमाणु एजेंसी प्रमुख राफेल ग्रॉसी के अनुसार, ईरान का यूरेनियम भंडार इस्फहान और नतांज में केंद्रित हो सकता है। ये दोनों स्थान पहले हमलों का निशाना बन चुके हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान नए ठिकाने बना सकता है।

ऑपरेशन की चुनौती
सैन्य विशेषज्ञ इसे बेहद जटिल मिशन मानते हैं। अमेरिकी सैनिकों को दुश्मन क्षेत्र में प्रवेश करना होगा। उन्हें मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस का सामना करना पड़ सकता है। जमीन पर पहुंचकर उन्हें इलाके को सुरक्षित करना होगा और यूरेनियम की खोज करनी होगी। इसके बाद, उसे सुरक्षित कंटेनरों में ले जाना होगा।

पूर्व कमांडर Joseph Votel ने कहा कि यह तेज कार्रवाई नहीं होगी। मिशन कई दिन ले सकता है। इसलिए, लंबी तैनाती की तैयारी जरूरी होगी।

तनाव बढ़ने का खतरा
विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि यह कदम संघर्ष को और बढ़ा सकता है। ईरान जवाबी हमला कर सकता है। इससे युद्ध लंबा खिंच सकता है। वहीं, अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। कई नेता लंबे युद्ध से बचना चाहते हैं।

बैकग्राउंड
अमेरिका पहले भी कजाकिस्तान और जॉर्जिया से परमाणु सामग्री हटाने में सफल रहा है। हालांकि, तब सहयोग मिला था। इस बार हालात अलग हैं। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही।

आगे क्या
अब फैसला ट्रंप के हाथ में है। वह कूटनीति या सैन्य कार्रवाई में से किसी एक रास्ते को चुन सकते हैं। फिलहाल, सैन्य तैयारी जारी है। आने वाले दिन तय करेंगे कि स्थिति बातचीत की ओर बढ़ेगी या टकराव की ओर।


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