लोकसभा में 90 मिनट का हमला: अमित शाह ने नक्सलवाद पर कैसे साधा निर्णायक वार

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नई दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में माहौल बदल दिया। उन्होंने साफ कहा कि देश नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। इसके बाद उन्होंने अपने दावे को ठोस तर्कों से मजबूत किया। उन्होंने डेटा रखा, इतिहास जोड़ा और सीधे राजनीतिक वार किए। नतीजतन, उन्होंने पूरे सदन का नैरेटिव अपने हाथ में ले लिया।

शाह शाम करीब 4 बजे सदन में पहुंचे। पहले उन्होंने चुप्पी चुनी। फिर उन्होंने हर वक्ता को ध्यान से सुना। इस बीच विपक्ष की मौजूदगी कमजोर दिखी। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और डिंपल यादव नजर नहीं आए। इसलिए सदन में साफ अंतर दिखा।

दूसरी ओर, शाह लगातार नोट्स लेते रहे। उन्होंने हर तर्क को दर्ज किया। उन्होंने जल्दबाजी नहीं दिखाई। बल्कि उन्होंने सुनकर जवाब तैयार किया। इस तरह उन्होंने अपनी रणनीति धीरे-धीरे मजबूत की।

इसके बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने बहस को नया मोड़ दिया। उन्होंने नक्सली हिंसा से जुड़ा अपना निजी अनुभव साझा किया। इससे माहौल गंभीर हो गया। साथ ही कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने तुरंत जवाब दिया। दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई।

इसी दौरान कंगना रनौत ने भी आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों का बचाव किया। इसके बाद विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। फिर भी कंगना अपने रुख पर कायम रहीं।

इस बीच शाह लगातार सक्रिय रहे। उन्होंने संकेत दिए। उन्होंने नोट्स मंगवाए। उन्होंने अपने जवाब को और धार दी। ये छोटे कदम उनकी बड़ी रणनीति का हिस्सा बने।

शाम 6:04 बजे शाह खड़े हुए। इसके साथ ही सदन का फोकस पूरी तरह बदल गया। उन्होंने शुरुआत इतिहास से की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर नक्सल विचारधारा को जगह देने का आरोप लगाया। इस बयान पर तुरंत विरोध हुआ। फिर भी शाह आगे बढ़ते रहे।

उन्होंने एक बड़ा तर्क पलटा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने गरीबी को बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने विपक्ष से सवाल किए। उन्होंने वैचारिक समर्थन पर सीधा निशाना साधा। इससे बहस और तेज हो गई।

जब हनुमान बेनीवाल ने सवाल उठाया, तब शाह ने तुरंत जवाब दिया। उन्होंने सख्त संदेश दिया कि सरकार हिंसा बर्दाश्त नहीं करेगी।

इसके बाद शाह ने अपना फोकस डेटा पर रखा। उन्होंने योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने 2019 से शुरू हुए प्रयासों को गिनाया। उन्होंने पुनर्वास और विकास योजनाओं को सामने रखा। साथ ही उन्होंने 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य दोहराया।

उन्होंने यह भी कहा कि कई विचारधाराएं नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दिखाती हैं। इसके जरिए उन्होंने बहस को नया फ्रेम दिया।

जमीन पर देखें तो छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र के कई इलाके लंबे समय से प्रभावित रहे हैं। हालांकि हाल के वर्षों में सुरक्षा अभियान तेज हुए हैं। सड़कों, स्कूलों और नेटवर्क कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। इससे सरकार को दावा मजबूत करने में मदद मिलती है।

फिर भी कुछ इलाकों में चुनौतियां बनी हुई हैं। इसलिए विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठाता है। इसी पृष्ठभूमि में शाह का बयान बड़ा राजनीतिक संदेश देता है।

शाह ने करीब 90 मिनट तक बोला। उन्होंने शुरुआत में चुप्पी रखी। फिर उन्होंने आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने तथ्य और राजनीति दोनों का इस्तेमाल किया। अंत में विपक्ष ने नारे लगाए। लेकिन तब तक बहस की दिशा बदल चुकी थी।

इस तरह शाह ने सिर्फ जवाब नहीं दिया। उन्होंने पूरा नैरेटिव सेट किया। उन्होंने नक्सलवाद पर सरकार का रुख साफ किया और राजनीतिक बढ़त हासिल की।


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