पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट में बड़ा फेरबदल: SIR समीक्षा में 35–40% नाम हटे, सियासत तेज
कोलकाता से इस हफ्ते बड़ा चुनावी अपडेट सामने आया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लाखों नामों की जांच हुई।
न्यायिक अधिकारियों ने करीब 32 लाख मामलों की समीक्षा की। इन मामलों में “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” यानी डेटा में गड़बड़ी पाई गई थी। इसके बाद उन्होंने लगभग 35 से 40 फीसदी नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए।
इस कदम के जरिए चुनाव आयोग ने सूची को साफ करने की कोशिश की। साथ ही उसने डुप्लीकेट और संदिग्ध एंट्री को चिन्हित करने पर जोर दिया।
ग्राउंड एंगल: तकनीकी गड़बड़ी से मचा हड़कंप
जैसे ही पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी हुई, जमीन पर हलचल बढ़ गई। लोग बड़ी संख्या में अपने नाम चेक करने पहुंचे।
हालांकि वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। कुछ समय के लिए सिस्टम ने हर वोटर को “अंडर एडजुडिकेशन” दिखाया। इससे आम लोगों में भ्रम और चिंता बढ़ी।
मनोज कुमार अग्रवाल ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी आई थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि वेबसाइट कुछ समय के लिए हैकिंग के असर में रही।
अब अधिकारी लोगों से दोबारा नाम जांचने की अपील कर रहे हैं।
सप्लीमेंट्री लिस्ट ने बढ़ाए सवाल
अधिकारियों ने सोमवार देर रात पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की। इस लिस्ट में करीब 10 लाख नाम अपलोड हुए।
इन नामों को न्यायिक अधिकारियों ने ई-साइन कर मंजूरी दी थी। हालांकि आयोग ने अब तक यह नहीं बताया कि कितने नाम असफल रहे।
चुनाव आयोग अब दूसरी लिस्ट जारी करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए उसने कलकत्ता उच्च न्यायालय से रोजाना लिस्ट जारी करने की अनुमति मांगी है।
इस देरी और अधूरी जानकारी ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
