दिल्ली में पेट्रोल-डीजल स्थिर, वैश्विक तनाव के बीच राहत; निजी कंपनी ने बढ़ाए दाम

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नई दिल्ली – राजधानी में शुक्रवार, 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे। इससे आम उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र को राहत मिली। हालांकि, वैश्विक कच्चे तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, इसलिए आगे की दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

आज दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर पर कायम है। डीजल के दाम भी पिछले दिन के स्तर पर टिके हुए हैं। तेल कंपनियां फिलहाल कीमतों में कोई बदलाव नहीं कर रही हैं। इस कारण बाजार में स्थिरता दिखती है, लेकिन सतर्कता भी बनी रहती है।

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र से अलग संकेत मिलते हैं। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। इस कदम से साफ होता है कि निजी कंपनियां लागत बढ़ने पर तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं। वहीं, सरकारी कंपनियां संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती हैं।

नीतिगत स्तर पर, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) अप्रैल 2022 से खुदरा कीमतों को बड़े स्तर पर स्थिर रखे हुए हैं। ये कंपनियां कच्चे तेल के महंगे होने पर नुकसान सहती हैं। इसके उलट, सस्ते दौर में मुनाफा निकालती हैं। इस रणनीति से उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ नहीं पड़ता।

इसी बीच, देश के अन्य शहरों में कीमतों का अंतर साफ दिखता है। बेंगलुरु में पेट्रोल ₹102.96 और डीजल ₹90.99 प्रति लीटर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84 और डीजल ₹92.39 है। हैदराबाद में पेट्रोल ₹107.46 और डीजल ₹95.70 तक पहुंच चुका है। कोलकाता में पेट्रोल ₹105.45 और डीजल ₹92.02 है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर दर्ज हुआ। ये अंतर राज्य कर और परिवहन लागत के कारण सामने आता है।

आम लोगों को राहत, लेकिन चिंता बरकरार

जमीनी स्तर पर, स्थिर कीमतें लोगों को थोड़ी राहत देती हैं। ऑटो चालक, कैब ड्राइवर और डिलीवरी एजेंट रोजाना ईंधन पर खर्च करते हैं। इसलिए दाम नहीं बढ़ते तो उनकी आय पर दबाव कम रहता है।

दिल्ली के कई पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। लोग राहत महसूस करते हैं, लेकिन भविष्य को लेकर चिंतित भी रहते हैं। छोटे कारोबारी बताते हैं कि स्थिर कीमतें उन्हें लागत नियंत्रित रखने में मदद करती हैं। वहीं, वे यह भी मानते हैं कि अचानक बढ़ोतरी से उन्हें तुरंत दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग भी इसी तरह सोचते हैं। बस और टैक्सी सेवाएं ईंधन पर निर्भर रहती हैं। इसलिए कीमतों में स्थिरता किराए को नियंत्रित रखने में मदद करती है। अगर दाम बढ़ते हैं, तो सीधा असर यात्रियों पर पड़ता है।

आयात निर्भरता और वैश्विक जोखिम

भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा, देश लगभग आधी प्राकृतिक गैस भी विदेशों से मंगाता है। इस कारण भारत वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित होता है।

खास तौर पर Strait of Hormuz बेहद अहम भूमिका निभाता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के बड़े हिस्से में तेल आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो वैश्विक सप्लाई तुरंत प्रभावित होती है।

हाल के घटनाक्रम ने चिंता बढ़ाई है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सरकारी और सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद ईरान ने इस क्षेत्र में जहाजों को लेकर चेतावनी दी। साथ ही, बीमा कंपनियों ने जहाजों को कवर देने से इनकार किया। इस वजह से तेल टैंकरों की आवाजाही धीमी पड़ गई।

ये हालात वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा करते हैं। अभी भारत में कीमतें स्थिर दिखती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव किसी भी समय असर डाल सकता है।

संतुलन बनाना चुनौती

फिलहाल, सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश करती हैं। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती है। लेकिन निजी कंपनियों के कदम संकेत देते हैं कि बाजार पूरी तरह दबाव से मुक्त नहीं है।

आने वाले समय में वैश्विक हालात अहम भूमिका निभाएंगे। अगर तनाव कम होता है, तो कीमतें स्थिर रह सकती हैं। वहीं, अगर स्थिति बिगड़ती है, तो कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं। ऐसे में घरेलू बाजार भी प्रभावित होगा।

कुल मिलाकर, दिल्ली में अभी ईंधन की कीमतें स्थिर हैं। इससे लोगों को राहत मिलती है। लेकिन वैश्विक संकेत बताते हैं कि यह स्थिरता अस्थायी भी हो सकती है। इसलिए बाजार और उपभोक्ता दोनों आने वाले बदलावों पर नजर बनाए हुए हैं।


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