ब्रिटेन की अदालत ने भारत पर जताया भरोसा, नीरव मोदी को प्रत्यर्पण से राहत नहीं

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लंदन की हाई कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की नई याचिका खारिज कर दी। उसने प्रत्यर्पण प्रक्रिया दोबारा खोलने से इनकार किया।

कोर्ट ने साफ कहा कि मामले में “असाधारण परिस्थितियां” नहीं दिखतीं। इसलिए दोबारा सुनवाई की जरूरत नहीं बनती।

साथ ही अदालत ने भारत सरकार के आश्वासनों को स्वीकार किया। उसने कहा कि ये आश्वासन स्पष्ट हैं और भरोसे के साथ दिए गए हैं।

ग्राउंड एंगल: भारत की कानूनी तैयारी ने बदला केस का रुख

भारत ने इस मामले में मजबूत रणनीति अपनाई। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने कहा कि उसने चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया।

एजेंसी ने बताया कि उसने लंदन में मजबूत पक्ष रखा। उसकी टीम सुनवाई के दौरान मौजूद रही। ब्रिटेन की ओर से क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने भी भारत का समर्थन किया।

इस समन्वय ने केस को निर्णायक दिशा दी। अदालत ने भी माना कि भारत ने अपने पक्ष को ठोस तरीके से रखा।

मोदी की दलीलें: पूछताछ और उत्पीड़न का खतरा बताया

नीरव मोदी ने अपने बचाव में कई तर्क दिए। उनके वकील एडवर्ड फिट्जगेराल्ड ने कहा कि भारत लौटने पर उन्हें पूछताछ और उत्पीड़न का खतरा रहेगा।

उन्होंने संजय भंडारी केस का हवाला दिया। उस फैसले में अदालत ने तिहाड़ जेल की स्थिति पर चिंता जताई थी।

वकील ने यह भी कहा कि मोदी एक हाई-प्रोफाइल आरोपी हैं। इसलिए जांच एजेंसियां उन पर ज्यादा दबाव डाल सकती हैं।

साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत में प्रभावी निगरानी तंत्र नहीं है। इसलिए सरकारी आश्वासन पर्याप्त नहीं माने जा सकते।

भारत का जवाब: पूछताछ नहीं होगी, सिर्फ ट्रायल चलेगा

भारत सरकार ने इन दलीलों का सीधे जवाब दिया। उसने दो औपचारिक आश्वासन पेश किए।

पहला आश्वासन विदेश मंत्रालय ने सितंबर 2025 में दिया। इसमें कहा गया कि प्रत्यर्पण के बाद किसी भी एजेंसी को नीरव मोदी से पूछताछ की जरूरत नहीं होगी।

दूसरा आश्वासन गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में दिया। इसमें पांचों एजेंसियों—CBI, ED, SFIO, DRI और CBDT—ने लिखित में कहा कि वे पूछताछ नहीं करेंगी।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में पूछताछ जरूरी हुई, तो पहले ब्रिटेन की अनुमति लेनी होगी।

इसके अलावा भारत ने बताया कि केस ट्रायल के लिए तैयार है। जांच पूरी हो चुकी है।

अदालत की टिप्पणी: आश्वासन बाध्यकारी, लेकिन चिंताएं भी मौजूद

अदालत ने भारत के आश्वासनों को बाध्यकारी माना। उसने कहा कि ये सिर्फ औपचारिक बयान नहीं हैं।

हालांकि अदालत ने कुछ चिंताएं भी दर्ज कीं। उसने भंडारी केस का जिक्र किया और कहा कि उस फैसले में गंभीर तस्वीर सामने आई थी।

फिर भी अदालत ने संतुलन बनाया। उसने कहा कि मौजूदा मामले में भारत के आश्वासन निर्णायक साबित होते हैं।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते मजबूत हैं। इसके अलावा मोदी को कानूनी और मेडिकल सहायता मिलेगी।

पृष्ठभूमि: बैंक घोटाले से शुरू हुआ मामला

नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक में बड़े घोटाले का आरोप है। इस केस में करीब ₹13,000 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी की बात सामने आई।

उनके मामा मेहुल चोकसी का नाम भी इस मामले में जुड़ा।

ब्रिटेन की पुलिस ने मार्च 2019 में मोदी को गिरफ्तार किया। तब से वह वहीं जेल में हैं।

भारत की अदालतों ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया। प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी संपत्तियां भी जब्त कीं।

आगे की राह: प्रत्यर्पण का रास्ता और साफ हुआ

इस फैसले के बाद नीरव मोदी के लिए कानूनी विकल्प सीमित हो गए। अदालत पहले भी उनकी अपील खारिज कर चुकी है।

अब प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना मजबूत हो गई है।

भारत इस फैसले को बड़ी कानूनी जीत मानता है। वहीं विशेषज्ञ कहते हैं कि यह फैसला भविष्य के मामलों के लिए भी मिसाल बनेगा।

फिलहाल यह स्पष्ट है कि ब्रिटेन की अदालत ने भारत के भरोसे को अहम माना। इसी भरोसे ने इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय कर दी।


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