हॉर्मुज़ पर राहत, लेकिन जोखिम बरकरार: ‘मित्र देशों’ में भारत को शामिल कर ईरान ने खोला रणनीतिक रास्ता
तेहरान ने गुरुवार को एक अहम संकेत दिया। उसने तनाव के बीच भी रणनीतिक संतुलन साधा। ईरान ने कुछ देशों को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी। इसी के साथ भारत को “मित्र देशों” की सूची में जगह मिली।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस फैसले की पुष्टि की। उन्होंने भारत, पाकिस्तान, इराक, चीन और रूस का नाम लिया। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने भी इस फैसले को सार्वजनिक किया।
इस कदम ने वैश्विक बाजारों को तुरंत संकेत दिया। एक ओर तनाव जारी है, वहीं दूसरी ओर सीमित आवाजाही जारी रखने की कोशिश दिखी।
ग्राउंड एंगल: भारत ने जहाजों पर बढ़ाई निगरानी, सप्लाई बनी रही
भारत ने मौके पर सतर्कता बढ़ाई। सरकार ने तुरंत स्थिति की समीक्षा की। जहाजरानी मंत्रालय ने साफ कहा कि भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं।
विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने ताजा जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “पाइन गैस” और “जग वसंत” नाम के दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित तरीके से हॉर्मुज़ पार कर चुके हैं। अब ये जहाज भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
इस अपडेट से राहत मिली। हालांकि अधिकारी लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर रहता है। इसलिए किसी भी बाधा का असर सीधे बाजार पर पड़ सकता है।
ईरान ने रखी शर्तें, ‘गैर-शत्रुतापूर्ण’ जहाजों को ही छूट
ईरान ने खुली छूट नहीं दी। उसने साफ नियम तय किए। तेहरान ने कहा कि केवल “गैर-शत्रुतापूर्ण” जहाज ही इस रास्ते से गुजर सकते हैं।
ईरान ने शर्त रखी कि कोई भी जहाज उसके खिलाफ गतिविधियों में शामिल नहीं होगा। साथ ही उसे तय सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।
न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन ने भी यही रुख दोहराया। उसने कहा कि हर जहाज को ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करना होगा। ईरानी रक्षा परिषद ने इस प्रक्रिया को अनिवार्य बना दिया।
इस रणनीति से ईरान ने दो लक्ष्य साधे। उसने एक तरफ दबाव बनाए रखा, वहीं दूसरी तरफ पूरी तरह बंदी से बचा।
अमेरिका-ईरान टकराव में हॉर्मुज़ बना मुख्य मुद्दा
हॉर्मुज़ अब सीधे टकराव के केंद्र में आ गया है। ईरान ने इसे शांति वार्ता में भी उठाया। यह प्रतिक्रिया डोनाल्ड ट्रम्प की 15 सूत्रीय योजना के जवाब में आई।
तेहरान ने साफ कहा कि वह इस जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता चाहता है। उसने अंतरराष्ट्रीय मान्यता और कानूनी गारंटी की मांग रखी।
इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि वह और ईरान का नेतृत्व मिलकर हॉर्मुज़ को नियंत्रित करेंगे। हालांकि ईरान ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया।
वैश्विक चिंता बढ़ी, ऊर्जा और खाद आपूर्ति पर असर
दुनिया भर में चिंता तेज हो गई। UN ने इस मार्ग को खुला रखने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि लंबा अवरोध तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई को रोक सकता है।
उन्होंने समय को बेहद अहम बताया। इस वक्त वैश्विक बुवाई का मौसम चल रहा है। ऐसे में उर्वरक की कमी खाद्य उत्पादन पर असर डाल सकती है।
इस बीच तेल की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। कई देशों ने शुरुआती कमी के संकेत भी दिए। बाजार हर नए घटनाक्रम पर तुरंत प्रतिक्रिया दे रहा है।
पृष्ठभूमि: क्यों अहम है हॉर्मुज़ का जलडमरूमध्य
हॉर्मुज़ दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में आता है। यह वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालता है।
इसकी भौगोलिक स्थिति इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसलिए यहां किसी भी रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
इतिहास में भी यह क्षेत्र कई बार तनाव का केंद्र बना। लेकिन मौजूदा स्थिति अलग है। अब सैन्य तनाव और आर्थिक दबाव एक साथ दिख रहे हैं।
आगे क्या: राहत अस्थायी, अनिश्चितता कायम
ईरान की मौजूदा नीति से फिलहाल राहत मिली। हालांकि स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।
भारत जैसे देशों को सीमित फायदा मिल रहा है। फिर भी सरकार जोखिम को नजरअंदाज नहीं कर रही। वह वैकल्पिक आपूर्ति और रणनीति पर भी काम कर रही है।
आने वाले दिनों में दो चीजें तय करेंगी कि हालात किस दिशा में जाएंगे। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की प्रगति। दूसरा, ईरान का टोल और नियंत्रण से जुड़ा फैसला।
फिलहाल हॉर्मुज़ खुला है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं। यही संतुलन इस संकट की सबसे बड़ी सच्चाई बन गया है।
