ईरान ने डोनाल्ड ट्रम्प पर सीधा हमला बोला। फिर, उसने खाड़ी में दांव बढ़ा दिया। शुक्रवार को मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि ट्रंप ने एक घंटे में “सात झूठे दावे” किए। उन्होंने यह बयान उसी समय दिया, जब ट्रंप अमेरिका में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। साथ ही, तेहरान ने संकेत दिया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही फिर सीमित कर सकता है।
इसके बाद, क़ालिबाफ ने अमेरिका की कथित नाकेबंदी को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि अगर दबाव जारी रहा तो ईरान रास्ता खुला नहीं रखेगा। उन्होंने साफ किया कि जहाज तय मार्ग से ही गुजरेंगे और उन्हें ईरान की अनुमति लेनी होगी। इस बयान से उन्होंने जमीन पर नियंत्रण की बात आगे बढ़ाई।
इसी बीच, बयानबाज़ी सोशल मीडिया पर तेज हुई। क़ालिबाफ ने कहा कि असली हालात मैदान तय करते हैं, न कि ऑनलाइन घोषणाएं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मीडिया युद्ध अब संघर्ष का अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ऐसे दबाव में नहीं आएगा।
वहीं, पहले अलग संकेत भी सामने आए। अब्बास अराघची ने कहा था कि संघर्षविराम के दौरान व्यापारिक जहाज गुजर सकते हैं। इस बयान से बाजार में हल्की राहत आई। तेल की कीमतें घटीं और निवेशकों ने राहत की सांस ली। लेकिन जमीनी तस्वीर अलग रही। होरमुज़ में जहाजों की आवाजाही कम रही और कंपनियों ने सतर्क रुख अपनाया।
इसके अलावा, ईरान के भीतर भी सवाल उठे। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने अराघची के बयान पर संदेह जताया। एजेंसी ने कहा कि इस बयान से समाज में भ्रम फैला। इस प्रतिक्रिया ने सरकारी रुख में असंगति को उजागर किया।
दूसरी ओर, ट्रंप ने अपने दावे दोहराए। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बिना शर्त रोकने पर सहमति दी। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान संवर्धित यूरेनियम सौंपेगा। हालांकि, ईरान ने इन दावों को तुरंत खारिज कर दिया और उन्हें गलत बताया।
उधर, ईरान की संसद ने नया कदम उठाने की तैयारी शुरू की। इब्राहिम रेज़ाई ने बताया कि संसद एक मसौदा कानून तैयार कर रही है। इस योजना के तहत, होरमुज़ से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लिया जा सकता है।
पृष्ठभूमि में देखें तो होरमुज़ लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम रास्ता रहा है। दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इसलिए, हर तनाव का असर सीधे बाजार और शिपिंग पर पड़ता है।
ताज़ा टकराव ने अनिश्चितता बढ़ा दी। एक तरफ ईरान शर्तें तय कर रहा है। दूसरी तरफ ट्रंप बड़े दावे कर रहे हैं। बाजार संकेत देता है, लेकिन जमीन पर सावधानी दिखती है। फिलहाल, नजरें खाड़ी पर टिकी हैं।