LPU पर ED की कार्रवाई: AAP सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर छापे, फेमा जांच तेज
प्रवर्तन निदेशालय (ED) पंजाब में सक्रिय होती है। बुधवार सुबह इसकी टीमें लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU), फगवाड़ा पहुंचती हैं। जालंधर और चंडीगढ़ यूनिट इस ऑपरेशन को लीड करती हैं। अधिकारी सीधे लवली ग्रुप से जुड़े परिसरों को निशाने पर लेते हैं। यह ग्रुप अशोक कुमार मित्तल के स्वामित्व में आता है, जो AAP के वरिष्ठ नेता हैं।
इसके बाद, जांच टीम दायरा बढ़ाती है। वे संबंधित कारोबारी इकाइयों में दस्तावेज़ खंगालते हैं। अधिकारी कंप्यूटर, फाइलें और लेन-देन के रिकॉर्ड की जांच करते हैं। जांच का फोकस विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत संभावित उल्लंघनों पर रहता है। टीम विदेशी लेन-देन और फंड फ्लो की कड़ियां जोड़ती है। साथ ही, अधिकारी स्थानीय पुलिस की मदद नहीं लेते और खुद ही पूरी कार्रवाई संभालते हैं।
इसी दौरान, कैंपस का माहौल बदल जाता है। सुबह से ही सुरक्षा सख्त नजर आती है। छात्र और स्टाफ छोटे समूहों में चर्चा करते दिखते हैं। कई लोग मोबाइल पर वीडियो बनाते हैं। कुछ विभागों में काम धीमा पड़ता है, लेकिन कई कक्षाएं जारी रहती हैं। प्रशासन सार्वजनिक बयान देने से बचता है, जिससे सस्पेंस और बढ़ता है।
उधर, इस कार्रवाई का राजनीतिक संदर्भ भी अहम बनता है। हाल ही में पार्टी ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी दी। उन्होंने इस पद पर राघव चड्ढा की जगह ली। इस बदलाव के कुछ ही दिन बाद यह कार्रवाई सामने आती है, जिससे सियासी हलचल तेज होती है। पार्टी के भीतर इसे रणनीतिक नियुक्ति माना जाता है, खासकर शिक्षा और उद्योग जगत में पकड़ मजबूत करने के लिए।
साथ ही, लवली ग्रुप का दायरा भी चर्चा में आता है। मित्तल इस यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर हैं। वे अपने भाइयों रमेश और नरेश मित्तल के साथ कारोबार संभालते हैं। एलपीयू देश-विदेश के हजारों छात्रों को आकर्षित करता है और खुद को ग्लोबल एजुकेशन हब के रूप में पेश करता है। अब यही प्रोफाइल जांच एजेंसियों का ध्यान खींचती है।
अंत में, ईडी की यह कार्रवाई शिक्षा क्षेत्र में विदेशी फंडिंग की निगरानी को लेकर बड़ा संकेत देती है। फिलहाल, टीमें सबूत जुटाती हैं और अगली कानूनी प्रक्रिया की तैयारी करती हैं।
