देश में 2026 विधानसभा चुनाव का पहला चरण खत्म होते ही सियासी हलचल तेज हो जाती है। केरल, असम और पुडुचेरी में मतदान पूरा होता है। अब राजनीतिक दलों का फोकस पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु पर शिफ्ट होता है।
सबसे पहले, भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़े उत्साहजनक तस्वीर दिखाते हैं। असम में 85% से ज्यादा मतदान दर्ज होता है और नया रिकॉर्ड बनता है। पुडुचेरी भी करीब 90% मतदान के साथ आगे रहता है। वहीं, केरल में भी 78% से अधिक वोटिंग होती है।
दिलचस्प बात यह रहती है कि महिला मतदाता आगे निकलती हैं। असम और केरल दोनों जगह महिलाएं पुरुषों से ज्यादा संख्या में वोट डालती हैं। इससे जमीनी स्तर पर राजनीतिक भागीदारी में बदलाव साफ दिखता है।
ग्राउंड पर, मतदान शांतिपूर्ण माहौल में पूरा होता है। 296 सीटों पर वोटिंग होती है और 5 करोड़ से ज्यादा मतदाता हिस्सा लेते हैं। पोलिंग बूथों पर सुबह से ही लंबी कतारें नजर आती हैं। पहली बार वोट डालने वाले युवाओं में खास उत्साह दिखता है।
इसके बाद, नजर पश्चिम बंगाल पर टिकती है। यहां चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होते हैं। मतगणना 4 मई को तय होती है। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हैं। वह राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं और “जंगल राज” का आरोप लगाते हैं।
इसी कड़ी में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी आक्रामक रुख अपनाते हैं। वह TMC के शासन को खत्म करने की बात कहते हैं। उनके बयान से चुनावी मुकाबला और तेज होता है।
दूसरी ओर, तमिलनाडु भी अहम मुकाबले के लिए तैयार होता है। यहां 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होता है। मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) गठबंधन के बीच सीधा रहता है।
हालांकि, इस बार एक नया चेहरा भी चर्चा में आता है। अभिनेता से नेता बने विजय चुनावी मैदान में उतरते हैं। उनके आने से मुकाबला त्रिकोणीय बन सकता है और खासकर युवा मतदाताओं पर असर पड़ सकता है।
पृष्ठभूमि में, ये चुनाव राष्ट्रीय राजनीति के लिए अहम संकेत देते हैं। पार्टियां अपनी ताकत परखती हैं और भविष्य की रणनीति तय करती हैं।
अंत में, पहला चरण मजबूत भागीदारी का संदेश देता है। अब असली परीक्षा बंगाल और तमिलनाडु में होती है, जहां हर दल पूरी ताकत झोंकता है।