US-ईरान वार्ता से पहले किले में बदला इस्लामाबाद, सख्त पहरे में राजधानी

0
US-ईरान वार्ता से पहले किले में बदला इस्लामाबाद, सख्त पहरे में राजधानी

इस्लामाबाद अहम कूटनीतिक मोड़ पर पहुंचता है। 11 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता तय होती है। ऐसे में प्रशासन तेजी से सुरक्षा बढ़ाता है और शहर को हाई अलर्ट पर रखता है।

सबसे पहले, सुरक्षा बल राजधानी की सड़कों पर गश्त तेज करते हैं। वे सरकारी इमारतों और अहम ठिकानों पर निगरानी बढ़ाते हैं। ग्राउंड पर रेड ज़ोन पूरी तरह घिरा नजर आता है। यहां संसद, दूतावास और बड़े होटल मौजूद हैं। इसलिए अधिकारी इस इलाके में आम लोगों की आवाजाही सीमित करते हैं।

इसके बाद, पुलिस कई जगहों पर चेकपोस्ट लगाती है। जवान हर वाहन की जांच करते हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हैं। साथ ही, ट्रैफिक पुलिस वैकल्पिक मार्ग लागू करती है ताकि विदेशी प्रतिनिधियों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे।

इसी दौरान, प्रशासन बड़ा फैसला लेता है। वह गुरुवार और शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित करता है। इस कदम से भीड़ कम होती है और सुरक्षा एजेंसियों को नियंत्रण आसान मिलता है। नतीजतन, स्कूल और बाजार बंद रहते हैं। कई इलाकों में सन्नाटा दिखता है और लोग जरूरी काम से ही बाहर निकलते हैं।

पृष्ठभूमि में, यह तैयारी एक नाजुक युद्धविराम के बाद होती है। अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के संघर्ष विराम पर सहमत होते हैं। यह स्थिति 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद बनी तनावपूर्ण परिस्थितियों से निकलती है। इसके बाद बातचीत का रास्ता खुलता है।

इसी कड़ी में, पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करता है। विदेश मंत्री इशाक डार बताते हैं कि सरकार प्रवेश प्रक्रिया आसान बनाती है। वह कहते हैं कि सभी प्रतिनिधियों और पत्रकारों को वीज़ा-ऑन-अराइवल दिया जाएगा। इसके लिए एयरपोर्ट पर विशेष डेस्क भी तैयार किए जाते हैं।

उधर, गृह मंत्री मोहसिन नक़वी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षा का भरोसा देते हैं। वह “फूलप्रूफ सुरक्षा” का आश्वासन देते हैं। साथ ही, 30 सदस्यीय अमेरिकी टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुंचती है और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करती है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ चिंता भी जताते हैं। वे पूछते हैं कि क्या इस्लामाबाद इतने बड़े आयोजन को पूरी तरह सुरक्षित रख पाएगा। वार्ता का मुख्य स्थल एक प्रमुख होटल में तय होता है, जहां सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभ्यास करती हैं।

अंत में, इस्लामाबाद एक अहम परीक्षा से गुजरता है। एक ओर, वह वैश्विक वार्ता की मेजबानी करता है। दूसरी ओर, वह सुरक्षा और सामान्य जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकती है कि यह शहर इस चुनौती को कैसे संभालता है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *