सीजफायर से लौटी रौनक, दलाल स्ट्रीट पर हरियाली; हॉरमुज़ खुलने से बाजार में नई ऊर्जा

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मंगलवार को दलाल स्ट्रीट पर तेज शुरुआत दिखी। निवेशकों ने खुलते ही खरीदारी बढ़ाई। वजह साफ रही—अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर। इसके चलते बाजार में भरोसा लौटा। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों ने करीब ₹14 लाख करोड़ की वैल्यू जोड़ दी।

सबसे पहले, बेंचमार्क सूचकांकों ने जोरदार उछाल लिया। S&P BSE सेंसेक्स 2,500 अंकों से ज्यादा चढ़ गया। वहीं, NSE निफ्टी 50 ने 700 अंकों से ज्यादा की तेजी दिखाई। इस तेजी ने साफ संकेत दिया कि निवेशक जोखिम लेने को तैयार हैं।

इसके बाद, कच्चे तेल की कीमतों ने राहत दी। पिछले हफ्तों में तेल $110 के पार गया था। लेकिन अब कीमत $100 से नीचे आ गई। इस गिरावट ने भारत जैसे आयातक देश के लिए दबाव कम किया। नतीजतन, बाजार में सकारात्मक माहौल बना।

इसी बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की खबर ने भरोसा और बढ़ाया। यह रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। जब यहां आवाजाही सामान्य होती है, तो सप्लाई का डर घटता है। इसलिए निवेशकों ने इसे मजबूत संकेत माना।

जमीन पर ट्रेडर्स ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। एविएशन और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में जोरदार खरीदारी दिखी। इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (IndiGo) सबसे आगे रहा और इसमें तेज उछाल आया। इसके बाद लार्सन एंड टुब्रो (L&T) में मजबूत खरीदारी दिखी। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) भी ऊपर गया, क्योंकि व्यापार गतिविधियों में सुधार की उम्मीद बढ़ी। वहीं, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व ने भी तेजी पकड़ी।

हालांकि, हर सेक्टर में एक जैसी चाल नहीं दिखी। आईटी शेयरों में हल्की कमजोरी रही। टेक महिंद्रा में गिरावट आई। साथ ही, इंफोसिस भी थोड़ा फिसला। इससे साफ हुआ कि सेक्टर-आधारित दबाव अभी बना हुआ है।

विशेषज्ञों ने इस रैली को अहम मोड़ बताया। उनका मानना है कि सीजफायर ने बाजार की दिशा बदल दी। तेल की कीमतों में गिरावट से आर्थिक दबाव कम होगा। साथ ही, फाइनेंशियल और ऑयल-लिंक्ड सेक्टर में रिकवरी की गुंजाइश बढ़ी है।

पृष्ठभूमि देखें तो हाल के हफ्तों में पश्चिम एशिया का तनाव बाजार पर भारी पड़ा था। निवेशक सतर्क हो गए थे। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। सीजफायर ने जोखिम घटाया और भरोसा लौटाया।

अंत में, यह तेजी उम्मीद जरूर जगाती है, लेकिन जोखिम खत्म नहीं हुआ। यह सीजफायर सिर्फ दो हफ्ते का है। आगे की कूटनीति ही तय करेगी कि यह रैली टिकेगी या फिर बाजार में फिर उतार-चढ़ाव लौटेगा।


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