नई दिल्ली – वित्त वर्ष के आखिरी दिन निवेशकों ने टैक्स बचाने की दौड़ तेज कर दी। ज्यादातर लोग ELSS और डिडक्शन पर ध्यान देते हैं। लेकिन अब कई निवेशक एक और रणनीति अपनाते दिख रहे हैं—टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग। यह तरीका नुकसान को अवसर में बदलता है और टैक्स बोझ कम करता है।
टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग का मतलब साफ है। निवेशक एक एसेट में हुए नुकसान को दूसरे एसेट के मुनाफे से एडजस्ट करते हैं। इससे कुल टैक्सेबल इनकम घटती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी निवेशक ने सोना या चांदी में मुनाफा कमाया और शेयरों में नुकसान उठाया, तो वह इन नुकसान को मुनाफे के खिलाफ सेट कर सकता है। इससे टैक्स कम हो जाता है।
अगर उसी साल मुनाफा नहीं हो, तब भी नुकसान बेकार नहीं जाता। निवेशक इसे 8 साल तक आगे ले जा सकते हैं और भविष्य में इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस साल बाजार ने अलग तस्वीर दिखाई। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। कई निवेशक नुकसान में बैठे हैं। वहीं सोना और चांदी ने मजबूत रिटर्न दिया। इसलिए कुछ निवेशकों पर ज्यादा टैक्स बोझ आया।
यही स्थिति टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग को खास बनाती है। निवेशक शेयरों के नुकसान से कमोडिटी के मुनाफे को एडजस्ट कर सकते हैं। इससे ऊंचे टैक्स से राहत मिलती है।
आर्चित गुप्ता ने भी इस रणनीति को अहम बताया। उन्होंने कहा कि निवेशक सिर्फ आज का टैक्स न देखें, बल्कि भविष्य की योजना बनाएं।
मान लीजिए किसी निवेशक ने सोना-चांदी से ₹6 लाख कमाए। वहीं शेयरों में ₹6.9 लाख का नुकसान हुआ। सबसे पहले वह ₹6 लाख नुकसान को मुनाफे से एडजस्ट करता है। इससे उस पर टैक्स खत्म हो जाता है।
इसके बाद ₹80,000 का नुकसान बचता है। अब यहां फैसला अहम बनता है।
अगर निवेशक इसे अभी इस्तेमाल करता है, तो उसे करीब 12.5% के हिसाब से ₹10,000 की बचत मिलती है। लेकिन अगर वह इसे अगले साल के लिए बचाकर रखता है और 30% टैक्स वाले मुनाफे से एडजस्ट करता है, तो बचत ₹24,000 तक पहुंच सकती है।
इस तरह निवेशक आज थोड़ा टैक्स देता है, लेकिन अगले साल ज्यादा बचत करता है।
जमीनी स्तर पर कई निवेशक जल्दबाजी करते हैं। वे तुरंत टैक्स बचाना चाहते हैं। लेकिन सही रणनीति लंबी अवधि में ज्यादा फायदा देती है।
फिर भी सावधानी जरूरी है। निवेशक सिर्फ टैक्स बचाने के लिए अच्छे शेयर न बेचें। इससे उनका दीर्घकालिक लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।
साथ ही, यह रणनीति तभी काम करती है जब भविष्य में मुनाफा हो। अगर मुनाफा नहीं हुआ, तो नुकसान का फायदा नहीं मिलेगा।
अब जब समयसीमा खत्म हो रही है, निवेशकों को अपना पोर्टफोलियो ध्यान से देखना चाहिए। उन्हें नुकसान और मुनाफे की पहचान करनी चाहिए। फिर तय करना चाहिए कि नुकसान अभी इस्तेमाल करें या आगे ले जाएं।
टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग सिर्फ टैक्स बचाने का तरीका नहीं है। यह एक स्मार्ट प्लानिंग टूल है, जो सही फैसले से लंबे समय में ज्यादा फायदा देता है।