नई दिल्ली – भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की। गिरावट पहले मिनट से दिखी। इसके बाद दबाव तेजी से बढ़ा। ईरान को लेकर बढ़ते तनाव ने निवेशकों का भरोसा हिलाया। साथ ही, कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची। इसलिए, ट्रेडर्स ने जोखिम कम करना शुरू किया।
S&P BSE सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा टूटा और 72,516 के करीब आ गया। इसी तरह NSE Nifty50 भी फिसला और 22,503 के आसपास कारोबार करता दिखा। साफ है, बाजार ने शुरुआत से ही कमजोरी दिखाई।
ग्राउंड एंगल:
दलाल स्ट्रीट पर माहौल सतर्क रहा। ट्रेडर्स हर ग्लोबल संकेत पर नजर रखे। कई निवेशकों ने नई खरीद से दूरी बनाई। उन्होंने पहले नुकसान सीमित करने पर ध्यान दिया। ब्रोकर्स ने खासकर बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली दर्ज की। रिटेल निवेशकों ने भी इंतजार करना बेहतर समझा। इस बीच, उतार-चढ़ाव बढ़ा और डर का संकेत मिला।
गिरावट की बड़ी वजहें
पहला कारण कच्चा तेल रहा। ईरान में तनाव बढ़ा, तो सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी। इसके चलते कीमतें ऊपर गईं। नतीजतन, महंगाई का डर फिर सामने आया। महंगा तेल भारत के आयात बिल को बढ़ाता है। साथ ही, कंपनियों की लागत भी बढ़ाता है। इसलिए, बाजार ने तुरंत नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
दूसरा कारण वैश्विक अनिश्चितता रही। एशियाई बाजार मिले-जुले संकेत देते दिखे। हालांकि, जोखिम लेने की क्षमता घटी। यही असर भारतीय बाजार पर भी दिखा।
एक्सपर्ट की राय
मार्केट एक्सपर्ट हितेश टेलर ने सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने निवेशकों से चयनात्मक रणनीति अपनाने को कहा। उन्होंने मजबूत कंपनियों में गिरावट पर खरीद की बात कही। हालांकि, उन्होंने शॉर्ट टर्म उछाल के पीछे भागने से मना किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि निफ्टी को 24,000 के ऊपर टिकना जरूरी है। तभी स्थिर रिकवरी का संकेत मिलेगा।
कौन चढ़ा, कौन टूटा
कमजोरी के बीच कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) करीब 1% चढ़ा और टॉप गेनर बना। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में भी हल्की बढ़त दिखी।
दूसरी ओर, बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट आई। एक्सिस बैंक 4% से ज्यादा टूटा। कोटक महिंद्रा बैंक भी तेज गिरा। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ट्रेंट लिमिटेड (Trent Limited) और बजाज फिनसर्व में भी बड़ी कमजोरी दिखी। इससे बाजार में व्यापक दबाव साफ नजर आया।
सेक्टर का हाल
ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में रहे। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों ने सबसे ज्यादा नुकसान झेला। ऑटो, फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स भी नीचे आए। आईटी और एफएमसीजी में हल्की गिरावट दिखी।
हालांकि, कुछ सेक्टरों ने सहारा दिया। मेटल शेयरों में तेजी आई। कच्चे माल की कीमत बढ़ने से इन्हें फायदा मिला। ऑयल और गैस शेयर भी चढ़े। मीडिया इंडेक्स में भी हल्की बढ़त दर्ज हुई।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1% से ज्यादा गिरे। इससे साफ हुआ कि बिकवाली व्यापक रही। वहीं, इंडिया VIX 5% से ज्यादा उछला। इससे बाजार में बढ़ते डर का संकेत मिला।
इतिहास बताता है कि तेल उत्पादक क्षेत्रों में तनाव का असर बाजार पर तुरंत पड़ता है। भारत तेल आयात पर निर्भर है। इसलिए, तेल की कीमत बढ़ते ही महंगाई और ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ती है। ऐसे हालात में बाजार अक्सर दबाव में आता है।
आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ईरान की स्थिति पर नजर रहेगी। अगर तनाव घटा, तो राहत मिल सकती है। लेकिन अगर तेल ऊंचा रहा, तो दबाव बना रह सकता है। इसलिए, निवेशक फिलहाल सतर्क और सोच-समझकर कदम उठा सकते हैं।