नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 3,900 मीटर रनवे के साथ देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की ओर
जेवर/दिल्ली-NCR – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उत्तर भारत के एविएशन सेक्टर में एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ।
अब यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के दूसरे अंतरराष्ट्रीय हब के रूप में काम करेगा। साथ ही, यह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर बढ़ते दबाव को कम करेगा।
प्रोजेक्ट का प्लान और विस्तार
सबसे पहले, सरकार ने इस परियोजना को दो चरणों में तैयार किया। शुरुआती चरण में चार फेज शामिल हैं।
इन फेज में यात्री क्षमता धीरे-धीरे बढ़ेगी। पहले यह आंकड़ा करीब 1.2 करोड़ यात्रियों से शुरू होगा। इसके बाद यह 7 करोड़ तक पहुंचेगा।
इसके बाद, दूसरे चरण में बड़ा विस्तार होगा। तब कुल क्षमता 22.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी। इस तरह, यह एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा बन सकता है।
1: विशाल क्षेत्र और इंफ्रास्ट्रक्चर
सबसे खास बात इसका आकार है। एयरपोर्ट 11,700 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैला है।
प्रशासन ने 87 एकड़ जमीन मल्टी-मॉडल कार्गो हब के लिए तय की। यहां वेयरहाउस, कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स जोन बनेंगे।
इसके अलावा, 40 एकड़ जमीन मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) के लिए रखी गई। खास बात यह है कि यह भारत का पहला एयरपोर्ट होगा, जहां इन-हाउस MRO सुविधा मिलेगी।
2: बड़ी यात्री क्षमता
इसके बाद, इस एयरपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता है।
अधिकारियों ने इसे लंबे समय के लिए डिजाइन किया। पहले चरण में सीमित संचालन शुरू होगा। लेकिन मांग बढ़ते ही क्षमता बढ़ाई जाएगी।
आखिरकार, यह हर साल 22.5 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा। इससे देश और अंतरराष्ट्रीय यात्रा दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
3: कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब
इसके साथ ही, कार्गो नेटवर्क भी मजबूत बनाया गया है।
मल्टी-मॉडल हब सड़क, रेल और हवाई मार्ग को जोड़ेगा। इससे सामान की आवाजाही तेज और आसान होगी।
करीब 30 एकड़ जमीन अलग-अलग टर्मिनल के लिए तय हुई। इसमें घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और एक्सप्रेस कूरियर सेवाएं शामिल होंगी।
इससे व्यापार और उद्योग को सीधा फायदा मिलेगा।
4: लंबा रनवे और आधुनिक तकनीक
एयरपोर्ट का रनवे भी खास है। इसकी लंबाई 3,900 मीटर है।
यह रनवे बड़े विमानों जैसे Boeing 777-300ER को संभाल सकता है। इससे लंबी दूरी की उड़ानें आसानी से संचालित होंगी।
इसके अलावा, एयरपोर्ट में आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें ILS और एडवांस्ड लाइटिंग सिस्टम शामिल हैं। इससे खराब मौसम में भी सुरक्षित संचालन संभव होगा।
5: पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन
आखिर में, इस प्रोजेक्ट में पर्यावरण का खास ध्यान रखा गया है।
एयरपोर्ट में प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन का उपयोग किया जाएगा। इससे ऊर्जा की बचत होगी।
साथ ही, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी के उपयोग की योजना भी है। लक्ष्य नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना है।जेवर और आसपास के इलाकों में इस प्रोजेक्ट का असर दिखने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन के दाम बढ़े हैं। छोटे व्यापारियों को नए मौके मिल रहे हैं।
टैक्सी चालक और होटल व्यवसायी भी खुश नजर आए। उन्हें उम्मीद है कि यात्रियों की संख्या बढ़ने से कमाई बढ़ेगी।
हालांकि, कुछ लोगों ने ट्रैफिक और शहरी दबाव को लेकर चिंता जताई। प्रशासन ने इन समस्याओं को संभालने का भरोसा दिया। दिल्ली-एनसीआर लंबे समय से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर निर्भर रहा।
यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ी। इसके कारण भीड़ और देरी जैसी समस्याएं सामने आईं। इसी वजह से सरकार ने दूसरे एयरपोर्ट की योजना बनाई। जेवर को बेहतर कनेक्टिविटी के कारण चुना गया। अब यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के विकास का बड़ा केंद्र बन सकता है।
