मालाबार गोल्ड का बड़ा CSR प्लान: ₹200 करोड़ खर्च करेगा समूह, पीयूष गोयल ने सराहा कदम
khabarworld 27/03/2026 0
नई दिल्ली – देश में कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी को नई दिशा मिलती दिख रही है। मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने बड़ा ऐलान किया है। कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 में ₹200 करोड़ CSR कार्यक्रमों पर खर्च करेगी। इस पहल को पीयूष गोयल ने सराहा और इसे विकास के लिए अहम बताया।
कंपनी ने यह घोषणा राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में की। इस मौके पर उद्योग और शिक्षा जगत के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में 33,000 छात्राओं के लिए स्कॉलरशिप वितरण की शुरुआत भी हुई। इसके साथ ही कंपनी ने देशभर में बड़े स्तर पर सामाजिक कार्यक्रम चलाने की योजना रखी।
मालाबार समूह ने साफ किया कि वह 19 राज्यों के 3,000 से ज्यादा स्थानों पर काम करेगा। वह 15 बड़े प्रोजेक्ट चलाएगा और दो लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखेगा। इस योजना में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और पर्यावरण जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।
ग्राउंड एंगल: जमीनी स्तर पर दिखता असर
जमीनी हकीकत इन योजनाओं का असर दिखाती है। स्लम और ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले बच्चे माइक्रो-लर्निंग सेंटर से लाभ लेते हैं। यहां उन्हें बुनियादी शिक्षा और मार्गदर्शन मिलता है। इससे स्कूल छोड़ने की दर घटती है।
छात्राएं स्कॉलरशिप के जरिए पढ़ाई जारी रखती हैं। कई परिवार आर्थिक दबाव के कारण बेटियों की पढ़ाई रोक देते हैं। लेकिन इस तरह की मदद उन्हें आगे बढ़ने का मौका देती है।
खाद्य वितरण कार्यक्रम भी अहम भूमिका निभाता है। रोजाना मिलने वाला भोजन कई परिवारों के लिए सहारा बनता है। वहीं, सस्ती दवाइयों की सुविधा गरीब मरीजों को राहत देती है।
स्थानीय स्तर पर लोग इन योजनाओं को सकारात्मक बदलाव के रूप में देखते हैं। इससे भरोसा बढ़ता है और समुदाय मजबूत होता है।
शिक्षा पर सबसे ज्यादा फोकस
मालाबार ने अपनी CSR रणनीति में शिक्षा को प्राथमिकता दी है। कंपनी ₹114 करोड़ शिक्षा कार्यक्रमों पर खर्च करेगी। इसमें स्ट्रीट बच्चों के लिए माइक्रो-लर्निंग सेंटर और छात्राओं के लिए स्कॉलरशिप शामिल हैं।
कंपनी ने पहले ही देशभर में 1,500 से ज्यादा लर्निंग सेंटर शुरू किए हैं। ये सेंटर प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के साथ मिलकर चलाए जाते हैं। अब कंपनी इनकी संख्या बढ़ाकर 2,500 करना चाहती है। इसके साथ ही छात्रों की संख्या 64,000 से बढ़ाकर एक लाख करने का लक्ष्य रखा गया है।
अन्य क्षेत्रों में भी बड़ा निवेश
मालाबार सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। कंपनी ने भूख मिटाने के लिए ₹30 करोड़ अलग रखे हैं। ‘हंगर फ्री वर्ल्ड’ प्रोजेक्ट के तहत हजारों लोगों को रोजाना भोजन मिलता है।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ₹14.2 करोड़ का बजट तय किया गया है। इसमें सस्ती दवाइयां और चिकित्सा सहायता शामिल हैं। इसके अलावा, ‘ग्रैंडमा होम’ जैसे आवास प्रोजेक्ट के लिए ₹25 करोड़ रखे गए हैं, जहां बेसहारा महिलाओं को रहने की सुविधा मिलती है।
कंपनी पर्यावरण पर भी ध्यान देती है। उसने ₹10 करोड़ पर्यावरण संरक्षण के लिए तय किए हैं। वहीं, अन्य सामाजिक कार्यों के लिए ₹6.8 करोड़ खर्च होंगे।
ये सभी कार्यक्रम मालाबार चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए चलाए जाते हैं। कंपनी अपने मुनाफे का 5% CSR कार्यों में लगाती है। इससे योजनाओं को निरंतर फंड मिलता है।
पृष्ठभूमि: CSR से बढ़ता सामाजिक योगदान
भारत में CSR की भूमिका लगातार बढ़ रही है। कंपनियां अब सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं रहतीं। वे समाज के विकास में भी योगदान देती हैं।
सरकार ने भी CSR को बढ़ावा दिया है। इससे कंपनियां शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में निवेश करती हैं। मालाबार जैसे बड़े समूह इस दिशा में उदाहरण पेश करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान गोयल ने भी इस बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति लोगों के सशक्तिकरण पर निर्भर करती है। खासकर महिलाओं और बेटियों को आगे बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने और अवसरों का उपयोग करने की सलाह दी।
उन्होंने B. R. Ambedkar के विचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ता है जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं।
आगे की दिशा: विस्तार और प्रभाव
आने वाले समय में मालाबार अपने CSR कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाएगा। वह ज्यादा लोगों तक पहुंचने और बेहतर परिणाम देने पर ध्यान देगा। कंपनी का लक्ष्य सिर्फ मदद देना नहीं, बल्कि स्थायी बदलाव लाना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की पहलें देश के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। जब शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर काम होता है, तो समाज मजबूत बनता है।
कुल मिलाकर, मालाबार गोल्ड का ₹200 करोड़ का CSR प्लान एक बड़ा कदम है। यह दिखाता है कि कॉर्पोरेट सेक्टर सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में आगे आ रहा है। अगर ऐसी पहलें जारी रहती हैं, तो देश में समावेशी विकास को और गति मिल सकती है।
