टकराव का असर गहरा: पीएम मोदी की चेतावनी, ‘टीम इंडिया’ से एकजुट होने की अपील

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नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका दिया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि इसके असर लंबे समय तक रह सकते हैं। इसलिए उन्होंने देश के भीतर एकजुटता और सतर्कता पर जोर दिया।

सबसे पहले पीएम ने हालात की गंभीरता बताई। उन्होंने कहा कि संघर्ष तीन हफ्ते से अधिक समय तक खिंच चुका है। इसके चलते ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। साथ ही प्रमुख व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं। नतीजतन पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक की नियमित आपूर्ति पर असर दिखने लगा है। उन्होंने साफ कहा कि भारत भी इस दबाव को महसूस कर रहा है।

इसके बाद पीएम ने भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार हर बदलती स्थिति पर नजर रख रही है। अधिकारी लगातार समीक्षा कर रहे हैं। फिर उसी आधार पर फैसले ले रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। इसलिए देश इस चुनौती का सामना करने की क्षमता रखता है।

ग्राउंड एंगल: बाजार, ट्रांसपोर्ट और आम लोग सतर्क

जमीनी स्तर पर असर धीरे-धीरे दिखने लगा है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ईंधन को लेकर चिंता बढ़ी है। कई ऑपरेटर अब सावधानी से योजना बना रहे हैं। दूसरी ओर थोक बाजारों में व्यापारी सीमित स्टॉक रख रहे हैं। वे कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क हैं।

उद्योग क्षेत्रों में भी हलचल बढ़ी है। खासकर उर्वरक और ऊर्जा पर निर्भर सेक्टर स्थिति पर नजर रख रहे हैं। छोटे कारोबारी लागत बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। वहीं आम लोग फिलहाल स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कई लोग सरकारी कदमों पर भरोसा भी जता रहे हैं।

पृष्ठभूमि: क्यों अहम है यह संकट

यह संकट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा केंद्र है। दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और गैस के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर करता है। इसके अलावा यहां से गुजरने वाले समुद्री मार्ग भी बेहद अहम हैं।

खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा सीधे कीमतों को प्रभावित करती है। साथ ही शिपिंग गतिविधियां भी धीमी पड़ती हैं। इसलिए भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाती है।

लंबे असर की चेतावनी

पीएम मोदी ने साफ कहा कि इस संकट के असर जल्दी खत्म नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष से वैश्विक बाजारों पर दबाव बना रहता है। इससे ऊर्जा महंगी हो सकती है। साथ ही आर्थिक रिकवरी भी धीमी पड़ सकती है।

हालांकि, उन्होंने संयम की सलाह दी। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने को कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांत दिमाग से फैसले लेने होंगे। तभी देश इस चुनौती से बेहतर तरीके से निपट पाएगा।

राज्यों को सख्त कदम उठाने की अपील

इसके बाद पीएम ने राज्यों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जरूरी वस्तुओं की सप्लाई बनाए रखना सबसे अहम है। इसलिए राज्यों को जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही गरीबों और प्रवासी मजदूरों का खास ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने कोविड काल की याद दिलाई। उस दौरान केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया। अब उन्होंने उसी तरह के “टीम इंडिया” मॉडल की जरूरत बताई। उनका कहना रहा कि मिलकर काम करने से संकट का असर कम होगा।

ऊर्जा और शिपिंग पर बढ़ती चिंता

इसी बीच समुद्री हालात भी चिंता बढ़ा रहे हैं। पीएम ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय जहाज वहां फंसे हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू सदस्य भी मौजूद हैं।

उन्होंने बताया कि भारत कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है। सरकार सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। साथ ही तनाव कम करने के प्रयास भी जारी हैं। उनका लक्ष्य साफ है—स्थिति सामान्य हो और रास्ता खुले।

विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता

पीएम मोदी ने प्रवासी भारतीयों का भी जिक्र किया। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने बताया कि अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित लौट चुके हैं। इनमें ईरान से आए 1,000 से ज्यादा लोग शामिल हैं। इनमें 700 मेडिकल छात्र भी हैं। सरकार लगातार निकासी और सहायता अभियान चला रही है।

कूटनीति पर जोर, वैश्विक संपर्क तेज

भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ाई है। पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने कई देशों के नेताओं से बातचीत की। इनमें ईरान,  इज़राइल और US शामिल हैं।

उन्होंने साफ कहा कि मानव जीवन पर खतरा किसी के हित में नहीं है। इसलिए भारत शांति का समर्थन करता है। वह सभी पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित कर रहा है। इससे तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।

आपूर्ति सुरक्षित करने और आत्मनिर्भरता पर जोर

अंत में पीएम ने भविष्य की रणनीति रखी। सरकार अब ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान दे रही है। वह कई देशों से तेल और गैस खरीदने की कोशिश कर रही है। इससे आपूर्ति बाधित होने का जोखिम कम होगा।

उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक तेल भंडार बनाया है। अब इसे और 65 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की योजना है। इसके अलावा 70,000 करोड़ रुपये का शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि आत्मनिर्भरता ही आगे का रास्ता है। भारत को अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। तभी वह ऐसे वैश्विक संकटों का सामना मजबूती से कर पाएगा।


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