शेयर बाजार में तेज शुरुआत के बाद उतार-चढ़ाव, स्विगी ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस; वैश्विक संकेतों का असर

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मुंबई – भारतीय शेयर बाजार ने आज मजबूती के साथ शुरुआत की, लेकिन जल्द ही शुरुआती बढ़त कुछ कम हो गई। शुरुआत में निवेशकों ने राहत की सांस ली, क्योंकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के पावर ग्रिड पर संभावित हमले को टालने का फैसला लिया। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका कम हुई और बाजार में सकारात्मक माहौल बना।

सबसे पहले, कारोबार की शुरुआत में 30 शेयरों वाला S&P BSE सेंसेक्स तेज उछाल के साथ खुला। इंडेक्स ने करीब 1,500 अंकों की बढ़त दर्ज की और 74,000 के पार पहुंच गया। इसके साथ ही Nifty 50 में भी जोरदार तेजी दिखी। यह लगभग 1.7% तक चढ़ा। शुरुआत में सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।

इसके बाद, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी मजबूती दिखाई। दोनों सेगमेंट में करीब 1.6% की बढ़त दर्ज हुई। इस तेजी से बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत मिला। निवेशकों ने बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में खास दिलचस्पी दिखाई।

हालांकि, कुछ ही समय बाद बाजार ने अपनी ऊंचाई से थोड़ा नीचे आना शुरू किया। मुनाफावसूली के कारण शुरुआती तेजी में हल्की कमी आई। इसके बावजूद, कुल मिलाकर बाजार का रुख सकारात्मक बना रहा। ट्रेडर्स ने सावधानी के साथ पोजीशन बनाए रखीं।

वैश्विक स्तर पर देखें तो अमेरिकी बयान ने बाजार को शुरुआती सपोर्ट दिया। डोनाल्ड ट्रम्प  ने कहा कि उन्होंने ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमले की योजना को फिलहाल टाल दिया है। उन्होंने इस फैसले के पीछे तेहरान के साथ हुई “सकारात्मक बातचीत” को वजह बताया। इस बयान से वैश्विक बाजारों में भी राहत का माहौल बना।

लेकिन इसके तुरंत बाद स्थिति थोड़ी उलझी हुई नजर आई। ईरान की संसद के स्पीकर ने सोशल मीडिया पर अलग दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई। इस विरोधाभास ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। इसलिए बाजार में उत्साह के साथ-साथ अनिश्चितता भी बनी रही।

घरेलू स्तर पर, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार पर असर डालती रहीं। विशेषज्ञों ने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। इससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।  वी. के. मल्होत्रा ने कहा कि बाजार की बड़ी चुनौती यही बनी हुई है।

उन्होंने आगे बताया कि रुपये की कमजोरी भी एक अहम कारण है। जब तक रुपया स्थिर नहीं होगा, तब तक विदेशी निवेशक सतर्क रहेंगे। इसलिए बाजार में स्थिरता के लिए मुद्रा में मजबूती जरूरी है। इस वजह से निवेशक फिलहाल हर वैश्विक संकेत पर नजर बनाए हुए हैं।

इसी बीच, उपभोक्ता क्षेत्र से भी एक अहम खबर सामने आई। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा दी। यह फैसला ऐसे समय आया, जब उसके प्रतिद्वंद्वी ज़ोमैटो पहले ही इसी तरह का कदम उठा चुका है। इस बदलाव से ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

ग्राउंड लेवल पर, निवेशकों का रुख मिला-जुला दिखा। कुछ निवेशक तेजी का फायदा उठाकर मुनाफा बुक करते नजर आए। वहीं, लंबी अवधि के निवेशकों ने गिरावट पर खरीदारी का मौका देखा। बाजार में यह संतुलन पूरे सत्र के दौरान बना रहा।

इसके अलावा, ब्रोकरेज फर्म्स ने भी सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रा की कमजोरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में ही निवेश करना चाहिए।

निष्कर्ष के तौर पर, आज का बाजार सकारात्मक शुरुआत के बावजूद सतर्क रुख दिखाता नजर आया। वैश्विक घटनाएं, विदेशी निवेश और मुद्रा की चाल—ये तीनों कारक बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक स्थिति स्पष्ट होती है और रुपया स्थिर रहता है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल, निवेशक हर छोटे-बड़े संकेत पर नजर रखकर आगे बढ़ रहे हैं।


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