सेंसेक्स में 1900 अंकों की बड़ी गिरावट, वेस्ट एशिया तनाव और महंगे तेल से बाजार पर दबाव

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मुंबई – हफ्ते की शुरुआत शेयर बाजार के लिए भारी रही। सोमवार को बाजार ने तेज गिरावट दर्ज की। एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स (S&P BSE Sensex) करीब 1900 अंक टूट गया, जबकि NSE Nifty50 में भी बड़ी गिरावट आई। इसके साथ ही निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी दर्ज हुई।

सबसे पहले, दोपहर करीब 1:10 बजे बाजार का हाल देखें। सेंसेक्स 1,923 अंकों की गिरावट के साथ 72,600 के आसपास पहुंच गया। वहीं, निफ्टी भी 600 से ज्यादा अंक फिसलकर 22,400 के करीब आ गया। दोनों प्रमुख सूचकांक करीब 2.5% से ज्यादा टूटे। यह गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे बाजार में बिकवाली का दबाव दिखा।

दरअसल, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह वेस्ट एशिया में जारी तनाव है। यह संघर्ष अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य  को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। यह मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है।

इसी कारण, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। वे सुरक्षित विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। हालांकि, इस बार दिलचस्प बात यह रही कि सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश भी दबाव में आए।

इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों ने बाजार पर अतिरिक्त बोझ डाला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं, WTI क्रूड भी 99 डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिखा। इस महीने में तेल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं।

महंगा तेल सीधे तौर पर भारत जैसे आयातक देशों को प्रभावित करता है। तेल की कीमत बढ़ते ही कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। इसके बाद महंगाई का दबाव बढ़ता है। नतीजतन, कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ता है और निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है।

दूसरी ओर, रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 93.89 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों में ही इसमें करीब 3% की गिरावट आई है। एशिया की अन्य मुद्राएं भी दबाव में रहीं, लेकिन रुपया सबसे ज्यादा प्रभावित दिखा।

कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, खासकर कच्चे तेल को। इससे महंगाई और बढ़ती है। यही वजह है कि बाजार में दबाव और गहरा हो गया। विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो रुपया आने वाले महीनों में और कमजोर हो सकता है।

जमीनी स्तर पर बाजार की गिरावट का असर हर सेक्टर में दिखा। बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली आई। HDFC बैंक में 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। ICICI बैंक और Axis बैंक भी नीचे फिसले। ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर में भी कमजोरी साफ दिखी। मारुति सुजुकी, टाइटन और एशियन पेंट्स जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट आई।

इसके विपरीत, आईटी सेक्टर ने थोड़ी मजबूती दिखाई। इन्फोसिस में मामूली गिरावट आई, जबकि TCS लगभग स्थिर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर रुपया आईटी कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा विदेश से आता है।

इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर और मेटल सेक्टर भी दबाव में रहे। लार्सन एंड टुब्रो (L&T), अल्ट्राटेक सीमेंट और अदाणी पोर्ट्स जैसे दिग्गज शेयरों में भी गिरावट आई। इससे साफ हुआ कि बाजार की कमजोरी व्यापक है और लगभग हर सेक्टर इससे प्रभावित हुआ।

पृष्ठभूमि में देखें, तो वैश्विक संकट का असर भारतीय बाजार पर लगातार पड़ता है। जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक जोखिम से दूरी बनाते हैं। वे नकदी या सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। इस बार भी वही ट्रेंड दिख रहा है।

विशेषज्ञों की राय भी इसी दिशा में इशारा करती है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में अनिश्चितता बहुत ज्यादा है। ऐसे समय में घबराहट में फैसले लेने से नुकसान बढ़ सकता है। निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।

हालांकि, कुछ सेक्टर आगे चलकर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। निर्यात आधारित कंपनियों को कमजोर रुपये का फायदा मिल सकता है। फार्मा और आईटी सेक्टर में सुधार की संभावना बनी रह सकती है।

अंत में, फिलहाल बाजार की दिशा पूरी तरह वैश्विक घटनाओं पर निर्भर दिख रही है। वेस्ट एशिया की स्थिति, तेल की कीमतें और रुपये की चाल—ये तीनों कारक बाजार को आगे भी प्रभावित करेंगे। जब तक इन मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।


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