चेन्नई में आज सियासी हलचल तेज हो गई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल शहर पहुंचे और सीट बंटवारे पर अंतिम चर्चा शुरू हुई। इस कदम के साथ BJP ने चुनावी रणनीति को निर्णायक मोड़ पर ला दिया।
सबसे पहले, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि गोयल के पहुंचते ही शीर्ष स्तर की बैठक होगी। इसके बाद सीट बंटवारे और गठबंधन की पूरी तस्वीर सामने आएगी। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी जल्द ही अपना घोषणापत्र भी जारी करेगी।
इसी बीच, भाजपा और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई। नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डीएमके भाजपा के बढ़ते प्रभाव से घबराई हुई है। उन्होंने “दिल्ली” को लेकर की जा रही टिप्पणियों को बेबुनियाद बताया।
इसके बाद, नागेंद्रन ने केंद्र सरकार की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में तमिलनाडु को करीब 14 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं मिलीं। उन्होंने तूतीकोरिन एयरपोर्ट विस्तार और त्रिची एयरपोर्ट परियोजना का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि ये विकास कार्य केंद्र की प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
वहीं, उन्होंने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने “गांजा संकट” का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में बड़ी मात्रा में नशा जब्त हुआ। उन्होंने विलाथिकुलम की घटना का भी जिक्र किया, जहां एक छात्रा पर हमला हुआ। उन्होंने सरकार से सार्वजनिक सुरक्षा पर ध्यान देने की मांग की।
इसके अलावा, संभावित “पांचवें मोर्चे” को लेकर भी चर्चा हुई। इसमें कुछ क्षेत्रीय दल और नेता शामिल हो सकते हैं। हालांकि, नागेंद्रन ने इसके असर को कम बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को नया मोर्चा बनाने का अधिकार है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि फिलहाल सबसे ज्यादा असर गर्मी का दिख रहा है।
जमीनी स्तर पर भाजपा आत्मविश्वास दिखा रही है। नागेंद्रन ने तिरुनेलवेली के मतदाताओं से अपने संबंध का जिक्र किया। उन्होंने अपने पिछले चुनावी प्रदर्शन को मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी विकास और गठबंधन की ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ गठबंधन में भी सीट बंटवारे को लेकर हलचल जारी है। डीएमके ने अपने सहयोगी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – CPI(M) को पांच सीटों का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव पर वाम दल के भीतर चर्चा तेज हो गई।
पिछले 20 दिनों से दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है। इस बार एक नया मोड़ तब आया जब एम. के. स्टालिन खुद बातचीत में शामिल हुए। उन्होंने सीपीआई(एम) नेताओं से पांच सीटें स्वीकार करने का आग्रह किया। उन्होंने बड़े गठबंधन में संतुलन बनाए रखने की जरूरत बताई।
इसके बाद, सीपीआई(एम) ने अपने रुख में थोड़ा बदलाव दिखाया। पार्टी ने पहले ज्यादा सीटों की मांग की थी। 2021 के चुनाव में वाम दलों ने छह-छह सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस बार गठबंधन में नए दल जुड़े हैं। इसलिए सीटों का बंटवारा और जटिल हो गया।
पार्टी ने अब संकेत दिया कि वह छह सीटों तक की मांग रख सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला अभी बाकी है। पार्टी की कार्यकारी समिति जल्द बैठक करेगी और निर्णय लेगी। फिलहाल, पार्टी गठबंधन छोड़ने के मूड में नहीं दिखती।
पृष्ठभूमि में देखें तो तमिलनाडु की राजनीति हमेशा गठबंधनों पर टिकी रहती है। क्षेत्रीय दलों की भूमिका यहां मजबूत रहती है। राष्ट्रीय दल अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में हर सीट का महत्व बढ़ जाता है।
जमीनी नजरिए से, यह पूरा घटनाक्रम चुनावी गणित को दर्शाता है। हर पार्टी अपने लिए बेहतर स्थिति चाहती है। साथ ही, गठबंधन को भी मजबूत रखना जरूरी होता है। यही संतुलन इस बार भी दिख रहा है।
फिलहाल, सभी की नजर चेन्नई पर टिकी है। पीयूष गोयल की बैठक के बाद तस्वीर साफ होगी। इसके बाद उम्मीदवारों और रणनीति का ऐलान तेज होगा। आने वाले दिन तमिलनाडु की सियासत को नई दिशा दे सकते हैं।