पंजाब में सियासी भूचाल: अधिकारी की मौत के बाद पूर्व मंत्री पर केस, गिरफ्तारी की मांग तेज

0
punj

अमृतसर में एक सरकारी अधिकारी की मौत ने सियासत को झकझोर दिया। इस घटना के बाद पुलिस ने पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर, उनके पिता और एक सहयोगी के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोप आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े हैं। इसके साथ ही विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ाया और तुरंत गिरफ्तारी की मांग उठाई।

सबसे पहले, घटना शुक्रवार को सामने आई। पंजाब राज्य भंडारण निगम के एक जिला प्रबंधक ने अमृतसर स्थित अपने घर पर जहर खाया। इसके बाद उनकी मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इस वीडियो में अधिकारी ने अपनी जान लेने की वजह डर को बताया और सीधे तौर पर भुल्लर का नाम लिया।

इसके बाद, पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। मृतक की पत्नी ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर रंजीत एवेन्यू थाने में केस दर्ज हुआ। पुलिस ने भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह और निजी सहायक दिलबाग सिंह को आरोपी बनाया। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकी देने और साझा मंशा जैसे आरोप जोड़े।

इसी बीच, सियासी घटनाक्रम तेजी से बदला। आम आदमी पार्टी (AAP)  सरकार में मंत्री रहे भुल्लर ने अपने पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने यह कदम तब उठाया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनसे इस्तीफा मांगा। भुल्लर ने कहा कि वह निष्पक्ष जांच में सहयोग करना चाहते हैं। हालांकि, इस फैसले से विवाद शांत नहीं हुआ।

जमीनी स्तर पर आरोप गंभीर हैं। मृतक की पत्नी ने कहा कि भुल्लर ने टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने का दबाव बनाया। उन्होंने दावा किया कि गोदाम निर्माण के टेंडर भुल्लर के पिता के नाम पर डाले गए। वह चाह रहे थे कि ये टेंडर उनके पक्ष में जाएं। लेकिन अधिकारी ने नियमों का पालन किया और दबाव नहीं माना।

इसके बाद, कथित तौर पर धमकियां शुरू हुईं। पत्नी ने आरोप लगाया कि भुल्लर और उनके सहयोगियों ने परिवार को नुकसान पहुंचाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर टेंडर नहीं मिला, तो बच्चों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इन आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।

आरोपों में एक और महत्वपूर्ण घटना सामने आई। 13 मार्च को भुल्लर ने अधिकारी को अपने घर बुलाया। पत्नी के अनुसार, वहां उनके साथ मारपीट हुई। उन्होंने दावा किया कि आरोपियों ने बंदूक की नोक पर उनसे एक झूठा बयान पढ़वाया। इस बयान में टेंडर आवंटन को लेकर रिश्वत का जिक्र कराया गया। इस घटना ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।

दूसरी ओर, विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोल दिया। शिरोमणि अकाली दल (SAD), कांग्रेस और भाजपा ने संयुक्त विरोध का ऐलान किया। रविवार को नेताओं ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश की। इस विरोध में प्रताप सिंह बाजवा , अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सुनील जाखड़ बिक्रम सिंह मजीठिया और दलजीत सिंह चीमा  शामिल हुए।

इसके बाद, हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने एमएलए हॉस्टल के पास भारी बल तैनात किया। रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की। तब पुलिस ने पानी की बौछारों का इस्तेमाल कर भीड़ को रोका। इस टकराव ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया।

विपक्ष ने अपनी मांग दोहराई। नेताओं ने भुल्लर की तुरंत गिरफ्तारी की बात कही। उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि बिना सख्त कार्रवाई के न्याय संभव नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो विरोध जारी रहेगा।

वहीं, सरकार ने अपना पक्ष रखा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करती। उन्होंने दोहराया कि कानून अपना काम करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी को बचाया नहीं जाएगा।

पृष्ठभूमि में यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता हमेशा अहम रहती है। ऐसे मामलों में दबाव या हस्तक्षेप के आरोप व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। इसलिए, यह मामला केवल एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है।

जमीनी नजरिए से देखें, तो यह एक परिवार की बड़ी त्रासदी है। एक अधिकारी ने जान गंवाई। परिवार ने गंभीर आरोप लगाए। अब पूरा ध्यान जांच पर है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सच सामने आएगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

फिलहाल, मामला जांच के दायरे में है। पुलिस सबूत जुटा रही है। सियासी बयानबाजी जारी है। आने वाले दिनों में यह मामला और दिशा ले सकता है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *