तमिलनाडु : मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य भ्रामक लेकिन फायदे में भाजपा

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चेन्नई, 23 मार्च (हि.स.)। दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में वैसे तो मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य काफी भ्रामक दिखता है लेकिन इसमें एकबात साफ दिख रही है कि भारतीय जनता पार्टी यहां फायदे में रहेगी। ऐसे कई कारण हैं जो इस तरह के परिणाम का पूर्वाभास करने के लिए पहले के परिणामों से काफी विपरीत हैं।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) दोनों मुख्य द्रविड़ियन पार्टियों की दिलचस्प विशेषता यह है कि जब भी केंद्र में राष्ट्रीय दल सत्ता में थे, उन्होंने बारी-बारी से भाजपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। दोनों ने सत्ता का स्वाद चखा और जरूरत के मुताबिक उनसे किनारा भी कर लिया। इसबार सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक गठबंधन का भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन, जबकि मुख्य विपक्षी दल डीएमके कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ है।
एक और सच्चाई यह है कि फिल्मी हस्तियों से प्रभावित यहां की राजनीतिक आबोहवा में राष्ट्रीय दलों का तबतक कोई किरदार नहीं देखा गया है, जबतक इन दोनों क्षेत्रीय दलों के साथ उनका राजनीतिक समझौता न हुआ हो। कुछ इसी शैली में 60 के दशक के शुरुआती दिनों से राज्य में केवल इन दो द्रविड़ दलों का दबदबा कायम है। राष्ट्रीय दलों को केवल तभी सीट मिल सकती है, जब द्रमुक या अन्नाद्रमुक इसकी सहमति दे। यह और बात है कि केंद्र में पदों पर जब कब्जा करने की बात आती है तो दबाव डालने, धमकी देने, ब्लैकमेल करने और यहां तक ​​कि सरकार गिराने सहित किसी भी पैंतरे से इन्हें परहेज नहीं है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इसबार भी 23 मई के बाद ये दोनों क्षेत्रीय दुश्मन केंद्र में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए एक-दूसरे से एक कदम आगे रहने की कोशिश करेंगे। तमिल उपन्यासकार और सामाजिक कार्यकर्ता एमआर पट्टाभिरमन ने दावा किया कि यदि कांग्रेस की अगुवाई में गठबंधन ने केंद्र में सरकार बनाई तो बिना किसी हिचकिचाहट के बहुमत पाने वाली डीएमके इसका हिस्सा होगी। उनका कहना है कि पिछले संसदीय चुनावों के विपरीत यह उम्मीद की जा रही थी कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों गठबंधन कमोबेश एक समान संख्या में सीटें साझा करेंगे।
दूसरी ओर, द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों ही टीटीवी दिनाकरन की अम्मा मक्कल मुनेत्र से तंजाऊर सीट हथियाने में लग गए हैं। यहां से तत्कालीन राज परिवार की पोती को मैदान में उतारे जाने की संभावना है। दिग्गज पत्रकार एसआर रामानुजन के अनुसार, तमिलनाडु के लोगों का मानस बहुत अजीब है। लिट्टे के बचे हुए लोगों में से कुछ राज्य में हैं।
एम.करुणानिधि महान वक्ता थे और अगड़े समुदाय से नफरत करते थे। उस संबंध में एमके स्टालिन एक अयोग्य बेटे हैं क्योंकि वह चुनाव प्रचार से संबंधित भाषणों के दौरान किसी भी तरह की खामियों को जारी रखते हैं। अन्नाद्रमुक सरकार अलोकप्रिय हो सकती है लेकिन वह कारक द्रमुक के लिए मत नहीं बटोर सकता। अन्नाद्रमुक के मोर्चे पर दक्षिण तमिलनाडु की 3-4 सीटें हो सकती हैं, जो शहरी मध्य वर्ग के प्रभुत्व वाले हैं। करुणानिधि की बेटी कनिमोझी तूतूकुडी निर्वाचन क्षेत्र में नादर समुदाय से संबंधित होने का दावा कर रही हैं क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में नादर लोगों का प्रभुत्व है। एसआर रामानुजन के अनुसार, राजनीतिक सुविधा के लिए अगड़े समुदायों को अलग कर दिया गया।
वर्तमान चुनावों में फिल्मी सितारों का प्रभाव स्पष्ट है। कैप्टन विजय कांत बीमार हैं और चुनाव प्रचार करने की स्थिति में नहीं हैं। अब उनकी पत्नी हैं जिनके पार्टी के कैडर के साथ अनुकूल संबंध नहीं है। डीएमडीके सिर्फ तेलुगु नायडू समुदाय के वोटों को हासिल करने में सक्षम हो सकता है लेकिन उससे कहीं से भी जीतने में सक्षम नहीं होगा। कमल हासन के पास पर्याप्त उम्मीदवार नहीं हैं जबकि सुपरस्टार रजनीकांत हमेशा की तरह कोई प्रचार नहीं कर रहे हैं।


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