पाकिस्तान वार्ता से पीछे हटा ईरान, अमेरिकी दबाव और होर्मुज तनाव ने बढ़ाई टकराव की आहट

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ईरान कूटनीति से पीछे हटता है। फिर, क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ता है। नतीजतन, युद्धविराम बढ़ाने की उम्मीद कमजोर पड़ती है।

रविवार को ईरान साफ करता है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका के साथ दूसरी दौर की वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। सरकारी मीडिया यह जानकारी देता है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी कि अमेरिकी प्रतिनिधि सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे। शुरुआत में अधिकारी प्रगति की उम्मीद जताते हैं। लेकिन, तेहरान तुरंत इस संभावना को खत्म कर देता है।

ईरान सीधे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराता है। वह अत्यधिक मांग, बदलते रुख और विरोधाभासी बयानों का हवाला देता है। साथ ही, वह अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताता है। इसलिए, तेहरान सख्त रुख अपनाता है।

उधर, उच्चस्तरीय बैठक में प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा अरेफ़ अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठाते हैं। वे इसे असंगत और दबाव आधारित बताते हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका पहले बातचीत की बात करता है, फिर रुख बदलता है। इस वजह से भरोसा और घटता है।

इस बीच, अमेरिका अपनी तैयारी जारी रखता है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहले दौर की वार्ता के बाद फिर इस्लामाबाद जाने की तैयारी करते हैं। पाकिस्तान राजधानी में सुरक्षा कड़ी करता है। हालांकि, ईरान के फैसले से पूरी प्रक्रिया अटक जाती है।

पहले संकेत अलग तस्वीर दिखाते थे। ईरानी सूत्र प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात करते थे। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र क़लीबाफ़ ने भी कूटनीति जारी रखने की बात कही थी। लेकिन, ट्रंप की नई चेतावनियां समीकरण बदल देती हैं।

ट्रंप सोशल मीडिया पर कड़ा संदेश देते हैं। वे ईरान के नागरिक ढांचे को निशाना बनाने की धमकी देते हैं। इससे तनाव और बढ़ता है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहते हैं।

विवाद की जड़ें गहरी हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय नेटवर्क और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण जैसे मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। इसलिए, बातचीत आगे नहीं बढ़ पाती।

जमीनी हालात भी गंभीर दिखते हैं। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने का ऐलान करता है। वह जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी देता है। इसके बाद सैकड़ों जहाज रास्ते में फंस जाते हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर का खतरा बढ़ता है।

हाल में, ईरानी गनबोट दो भारतीय जहाजों पर फायर करती हैं। दोनों जहाज पीछे हटते हैं। इससे समुद्री सुरक्षा पर चिंता बढ़ती है।

कुल मिलाकर, करीब दो महीने से जारी संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंचता है। एक तरफ कूटनीति ठहरती है। दूसरी तरफ सैन्य दबाव बढ़ता है। अगर रुख नहीं बदलता, तो आने वाले दिन और मुश्किल हो सकते हैं।


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