मणिपुर में शोक गुस्से में बदलता है। बिष्णुपुर जिला में बम धमाका दो बच्चों की जान लेता है। यह घटना पूरे घाटी क्षेत्र को झकझोर देती है। इसके तुरंत बाद, विरोध तेजी से फैलता है।
इसके साथ ही, जनजीवन पटरी से उतर जाता है। बाजार बंद रहते हैं। स्कूल और कॉलेज ताले में बंद दिखते हैं। बैंक और दफ्तर काम रोक देते हैं। दूसरी ओर, सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है। लोग घरों में रहते हैं, जबकि सुरक्षा बल सख्ती बढ़ाते हैं।
फिर, संगठित विरोध सामने आता है। मणिपुर की अखंडता पर समन्वय समिति’ (सीओसीओएमआई) इम्फाल में रैली निकालता है। लोग वांखई एंड्रो पार्किंग में जुटते हैं। वे पोस्टर और बैनर उठाते हैं। वे मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम के इस्तीफे की मांग करते हैं।
हालांकि, हालात जल्द बिगड़ते हैं। प्रदर्शनकारी कर्फ्यू को चुनौती देते हैं। पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है। पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़ती है। साथ ही, वह रैली को आगे बढ़ने से रोकती है। इस कदम से गुस्सा और बढ़ता है।
इसके बाद, विरोध के स्वर और तेज होते हैं। सीओसीओएमआई (COCOMI) के सदस्य सरकार पर सीधा आरोप लगाते हैं। वे कहते हैं कि प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर पाया। वे हाल के कानून-व्यवस्था के हालात को गंभीर बताते हैं।
इसी बीच, एक और घटना चर्चा में आती है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) कैंप के पास फायरिंग की बात सामने आती है। स्थानीय लोग दावा करते हैं कि इसमें तीन युवाओं की जान गई। विरोधी इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक बताते हैं। इससे भरोसा और कमजोर पड़ता है।
इम्फाल के अलावा, विरोध अन्य जिलों तक फैलता है। ककचिंग जिला (Kakching) में महिलाएं धरना देती हैं। केइराक अपुनबा मीरा पैबी इस विरोध का नेतृत्व करता है। महिलाएं हमले की निंदा करती हैं। साथ ही, वे सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाती हैं।
जमीनी स्तर पर डर साफ दिखता है। दुकानदार शटर नहीं उठाते। वाहन कम चलते हैं। लोग हर खबर पर नजर रखते हैं। अनिश्चितता लोगों की दिनचर्या पर असर डालती है।
दूसरी ओर, सरकार सक्रिय होती है। मुख्यमंत्री क़ानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हैं। वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल होते हैं। सेना और अर्धसैनिक बल भी चर्चा में भाग लेते हैं। सरकार हालात का आकलन करती है और नई रणनीति बनाती है।
इसके बाद, सुरक्षा और कड़ी होती है। इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, बिष्णुपुर, काकचिंग और थौबल में कर्फ्यू लागू रहता है। प्रशासन शांति बहाल करने की बात दोहराता है।
पृष्ठभूमि में देखें, तो मणिपुर पहले से तनाव झेलता है। पुराने विवाद और असुरक्षा की भावना हालात को जटिल बनाते हैं। अब यह नई घटना उस तनाव को और बढ़ा देती है। आने वाले दिन तय करेंगे कि हालात संभलते हैं या और बिगड़ते हैं।