मालदा – पश्चिम बंगाल में सियासी और प्रशासनिक तनाव बढ़ा। इसी बीच पुलिस ने तेज कदम उठाया। उसने Mofakkerul Islam को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियां उन्हें मालदा हिंसा का मुख्य सूत्रधार बता रही हैं। पुलिस ने उन्हें बागडोगरा एयरपोर्ट से पकड़ा, जब वे राज्य से बाहर जाने की कोशिश कर रहे थे।
सबसे पहले, बुधवार को हालात बिगड़े। बड़ी संख्या में लोग कालियाचक II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस पहुंचे। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से मुलाकात मांगी। हालांकि, अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी। इसके बाद भीड़ भड़क गई। करीब शाम चार बजे प्रदर्शनकारियों ने दफ्तर को घेर लिया। उन्होंने सात न्यायिक अधिकारियों को अंदर ही रोक लिया। इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। एक अधिकारी का पांच साल का बच्चा भी वहीं मौजूद रहा।
इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को नौ घंटे से ज्यादा समय तक रोके रखा। वहीं पुलिस ने रणनीति बनाई। देर रात टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, बाहर निकलते समय भीड़ ने हमला किया। लोगों ने पुलिस वाहनों पर पथराव किया। वीडियो में टूटी गाड़ियां और भागते वाहन दिखे। इसके बावजूद पुलिस ने ऑपरेशन पूरा किया।
यह पूरा विवाद मतदाता सूची संशोधन से जुड़ा है। Election Commission of India ने चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन शुरू किया। इस प्रक्रिया ने बड़ा असर डाला। अधिकारियों ने 63 लाख से ज्यादा नाम हटाए। साथ ही, करीब 60 लाख नामों को जांच के दायरे में रखा। न्यायिक अधिकारी इन मामलों की समीक्षा कर रहे थे। वे तय करते कि किसका नाम सूची में रहेगा।
ग्राउंड पर लोगों में चिंता बढ़ी। कई स्थानीय निवासियों ने सूची से नाम हटने पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने पारदर्शिता की मांग की। कई परिवारों ने कहा कि वे अपनी पहचान और अधिकार को लेकर असमंजस में हैं। यही नाराजगी धीरे-धीरे विरोध में बदल गई। मालदा का प्रदर्शन इसी असंतोष का बड़ा रूप बनकर सामने आया।
इसी बीच मामला Supreme Court of India पहुंचा। गुरुवार को सुनवाई हुई। पीठ का नेतृत्व Surya Kant ने किया। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। उसने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उसने इस घटना को गंभीर चूक बताया। कोर्ट ने कहा कि यह घटना संस्थाओं की गरिमा को चुनौती देती है।
इसके बाद कोर्ट ने कई निर्देश दिए। उसने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात करने को कहा। उसने जांच को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया। उसने CBI या NIA के विकल्प सुझाए। साथ ही, उसने राज्य के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया। मुख्य सचिव, डीजीपी और जिला प्रशासन से जवाब मांगा गया।
इसके अलावा, कोर्ट ने जमीनी स्तर पर भी सख्ती दिखाई। उसने बीडीओ दफ्तर में प्रवेश सीमित करने को कहा। उसने साफ निर्देश दिया कि एक समय में केवल तीन से पांच लोग ही अंदर जाएं। इस कदम से व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश हो रही है।
अब पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है। वह अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है। सुरक्षा बलों ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई है। प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर, यह मामला चुनाव से पहले बढ़ते तनाव को दिखाता है। यह प्रशासनिक फैसलों और जनभावनाओं के टकराव को सामने लाता है। आने वाले दिनों में जांच और कोर्ट की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी रहेगी।