देशभर में ईंधन पर्याप्त, एलपीजी आपूर्ति पर सरकार का फोकस; संकट के बीच सप्लाई चेन मजबूत

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नई दिल्ली ने वैश्विक तनाव के बीच ईंधन आपूर्ति को लेकर स्थिति साफ की। केंद्र ने मंगलवार को भरोसा जताया कि देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने साथ ही एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी, खासकर गरीब और प्रवासी परिवारों के लिए।

पेट्रोल-डीजल सप्लाई स्थिर, घबराहट की जरूरत नहीं

सबसे पहले, अधिकारियों ने देश के रिटेल नेटवर्क पर भरोसा जताया। करीब 1 लाख पेट्रोल पंप लगातार काम कर रहे हैं और सभी जगह ईंधन उपलब्ध है। इसलिए आम लोगों को किसी कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा।

इसके साथ ही, मंत्रालय ने सप्लाई चेन पर नजर बनाए रखी है। अधिकारी हर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं ताकि कहीं भी बाधा न आए। इस कदम से बाजार में स्थिरता बनी हुई है।

एलपीजी को प्राथमिकता, उत्पादन बढ़ाया

दूसरी ओर, सरकार ने एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता दी। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा  ने बताया कि रिफाइनरियों ने उत्पादन संतुलन बदला है। उन्होंने पेट्रोकेमिकल्स के बजाय एलपीजी उत्पादन बढ़ाया।

इस फैसले से प्राथमिक उपभोक्ताओं को राहत मिली। इसमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थी और प्रवासी श्रमिक शामिल हैं। करीब 1.1 करोड़ से ज्यादा परिवारों को इस योजना से सीधा लाभ मिल रहा है।

आयात और घरेलू उत्पादन से संतुलन

भारत ने एलपीजी की मांग पूरी करने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई। एक ओर देश ने घरेलू उत्पादन बढ़ाया। दूसरी ओर, उसने आयात पर भी जोर रखा।

भारत अपनी करीब 60% एलपीजी जरूरतें आयात से पूरी करता है। इसलिए सरकार ने समय रहते कई कार्गो तय किए। इससे सप्लाई पर दबाव कम हुआ।

होरमुज़ से गुजर रहे जहाज, सप्लाई जारी

इस बीच, पश्चिम एशिया से एलपीजी की आवाजाही जारी रही। शिपिंग सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि दो बड़े जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं।

एक जहाज मंगलुरु बंदरगाह पहुंचेगा, जबकि दूसरा कांडला पहुंचेगा। इसके अलावा, कई और जहाज भारत के लिए रवाना होने की तैयारी में हैं।

इस लगातार सप्लाई से बाजार में भरोसा बना हुआ है।

PNG पर जोर, एलपीजी पर दबाव घटाने की कोशिश

सरकार ने दीर्घकालिक समाधान पर भी ध्यान दिया। उसने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के उपयोग को बढ़ावा दिया।

ऊर्जा नियामक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने शहर गैस कंपनियों को निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल, हॉस्टल, आंगनवाड़ी और सामुदायिक रसोई में PNG कनेक्शन देने को कहा।

सरकार का मानना है कि इससे एलपीजी पर दबाव घटेगा और सप्लाई और बेहतर होगी।

ग्राउंड एंगल: उपभोक्ता सतर्क, लेकिन सप्लाई सामान्य

जमीनी स्तर पर लोगों ने सतर्कता दिखाई। कुछ जगहों पर लोगों ने जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक किए। हालांकि, इससे सप्लाई पर असर नहीं पड़ा।

डिस्ट्रिब्यूटर लगातार डिलीवरी कर रहे हैं। शहरों और कस्बों में गैस की सप्लाई सामान्य बनी हुई है। होटल, ढाबे और छोटे व्यवसाय भी बिना रुकावट काम कर रहे हैं।

इससे साफ है कि सिस्टम दबाव में भी काम कर रहा है।

व्यावसायिक सेक्टर को भी राहत

सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सप्लाई को भी संतुलित किया। उसने 21 मार्च से आपूर्ति बढ़ाकर जरूरत का करीब 50% कर दिया।

इसमें रेस्टोरेंट, होटल, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और कैंटीन को प्राथमिकता मिली। इसके अलावा, गरीबों और प्रवासियों के लिए चलने वाली रसोई को भी पर्याप्त गैस दी जा रही है।

राज्यों और कंपनियों में समन्वय

इस पूरी प्रक्रिया में राज्यों और कंपनियों ने मिलकर काम किया। 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सप्लाई के लिए आदेश जारी किए।

जहां आदेश नहीं आए, वहां सरकारी तेल कंपनियों ने खुद जिम्मेदारी ली। अब तक हजारों टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति हो चुकी है।

पृष्ठभूमि: मजबूत रिफाइनिंग क्षमता, लेकिन आयात पर निर्भरता

भारत दुनिया के बड़े रिफाइनिंग हब में शामिल है। उसकी सालाना क्षमता 250 मिलियन टन से ज्यादा है। इससे उत्पादन में लचीलापन मिलता है।

फिर भी, एलपीजी के लिए देश आयात पर निर्भर रहता है। इसलिए वैश्विक हालात का असर पड़ सकता है। सरकार इसी वजह से सप्लाई को विविध स्रोतों से सुरक्षित करती है।

निष्कर्ष: संकट में भी नियंत्रण, आगे की तैयारी जारी

अंत में, सरकार ने साफ किया कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। उसने उत्पादन, आयात और नीति के जरिए संतुलन बनाए रखा।

साथ ही, उसने कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी और लंबी अवधि के समाधान पर काम शुरू किया।

हालांकि, वैश्विक तनाव अभी जारी है। फिर भी, मौजूदा हालात में सप्लाई स्थिर दिख रही है। अगर यही रणनीति जारी रही, तो देश बड़े झटकों से बच सकता है।


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