पश्चिम एशिया संघर्ष में 6 भारतीयों की मौत, सरकार ने तेज किया राहत और सुरक्षा अभियान

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विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक अहम अपडेट दिया। मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मिसाइल और ड्रोन हमले के दौरान एक भारतीय नागरिक की मौत हुई। यह घटना 18 मार्च को सामने आई।

इसके बाद, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी असीम महाजन ने मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। साथ ही, भारतीय दूतावास ने परिवार से संपर्क बनाया और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय शुरू किया।

इसके अलावा, अधिकारियों ने बताया कि मृतक का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की तैयारी चल रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह हमला ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान हुआ।


दूसरी ओर, इस संघर्ष में भारतीयों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ा। इससे पहले, 13 फरवरी को ओमान के एक औद्योगिक क्षेत्र में हमले के दौरान दो भारतीयों की जान गई। वहीं, समुद्री क्षेत्र में हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई।

इसके साथ ही, एक भारतीय नागरिक अब भी लापता बताया गया। इस तरह कुल मृतकों की संख्या 6 तक पहुंच गई। यह स्थिति सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी।


इसी बीच, कई भारतीय नागरिक घायल भी हुए। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान और इराक में अलग-अलग हमलों में दर्जनों लोग प्रभावित हुए।

इनमें मजदूर और समुद्री कर्मचारी शामिल हैं। इसलिए, सरकार ने उनकी सुरक्षा और चिकित्सा सहायता पर विशेष ध्यान दिया।

इसके बाद, भारत सरकार ने तेज कार्रवाई शुरू की। उसने पश्चिम एशिया में रह रहे करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार संपर्क अभियान चलाया।

विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय देशों के नेताओं से बातचीत की। साथ ही, भारतीय मिशनों ने जमीनी स्तर पर राहत कार्य तेज किए। इस दौरान, अधिकारियों ने सुरक्षित निकासी और यात्रा की व्यवस्था पर जोर दिया।इसी क्रम में, कई भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया गया। मंत्रालय ने बताया कि 28 फरवरी से अब तक करीब 3 लाख लोग भारत लौट चुके हैं।

इसके अलावा, उड़ानों की संख्या भी बढ़ाई गई। UAE से 90 उड़ानें संचालित हुईं। वहीं, ,ओमान-सऊदी अरब  से भी नियमित सेवाएं जारी रहीं।

कतर ने आंशिक रूप से हवाई क्षेत्र खोला, जिसके बाद विशेष उड़ानें शुरू हुईं। वहीं, कुवैत से भी विशेष फ्लाइट्स चलाई गईं।जमीन पर हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों में हवाई क्षेत्र बंद है, जिससे लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।

भारतीय अधिकारी नागरिकों को सुरक्षित सीमा पार कराने में मदद कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, कुवैत, बहरीन और इराक में फंसे लोगों को सऊदी अरब पहुंचाया गया, जहां से उन्हें फ्लाइट मिली।

इसी तरह, इज़राइल  में मौजूद भारतीयों को जॉर्डन के रास्ते बाहर निकाला गया। वहीं, ईरान से लोग आर्मेनिया और अज़रबैजान के जरिए लौटे।

इसके साथ ही, समुद्री क्षेत्र में भी राहत अभियान चला। एक तेल टैंकर पर हमले के बाद 15 भारतीय क्रू मेंबर्स की वापसी की तैयारी हुई।इसके अलावा, 24 नाविकों का एक समूह ओमान से भारत लौटा। इनमें अलग-अलग जहाजों के कर्मचारी शामिल थे।


पश्चिम एशिया में यह संघर्ष 28 फरवरी से तेज हुआ। इसके बाद से क्षेत्र में लगातार हमले हो रहे हैं। इसका असर नागरिकों और व्यापार दोनों पर पड़ा।

इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। वे तेल, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, किसी भी संकट का सीधा असर भारत पर पड़ता है।कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का संकट गहराता दिख रहा है। भारतीयों की मौत और चोटों ने चिंता बढ़ाई। हालांकि, सरकार ने तेजी से कदम उठाए और बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाया।

अब आगे की रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं। तब तक, सरकार का फोकस अपने नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षित वापसी पर बना रहेगा।


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