दिलीप घोष ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बलों के बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए केंद्रीय सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने अपने बयान को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान हुए तनाव और हिंसा से जोड़ा।
सबसे पहले, घोष ने SIR के दौरान हालात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में टकराव और विवाद सामने आए। इसलिए उन्होंने दावा किया कि सिर्फ राज्य पुलिस के भरोसे चुनाव कराना जोखिम भरा होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव एक बड़ा और जटिल काम है। साथ ही, उन्होंने जोड़ा कि बंगाल में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अक्सर तनाव को जन्म देती है। ऐसे में केंद्रीय बल स्थिति को संतुलित रखते हैं।
इसके बाद, घोष ने भाजपा की परिवर्तन यात्रा पर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार यात्रा की अनुमति नहीं दे रही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी को अदालत से मंजूरी मिली है। इसलिए भाजपा यात्रा जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है। उनके मुताबिक, आगामी चुनाव जनता को यह अवसर देगा।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसी सप्ताह SIR प्रक्रिया पर चिंता जताई। उन्होंने आशंका जताई कि करीब 1.20 करोड़ नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह विषय दल और धर्म से ऊपर है। उनके अनुसार, मतदाता सूची की शुद्धता सीधे नागरिक अधिकारों को प्रभावित करती है।
इसी बीच, राज्य सरकार ने एक अहम न्यायिक फैसले का स्वागत किया। भारत का उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को अतिरिक्त सिविल जज तैनात करने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि कम से कम तीन साल का अनुभव रखने वाले जज इस प्रक्रिया में शामिल हों। जरूरत पड़ने पर झारखंड और ओडिशा हाई कोर्ट से भी सहयोग लिया जा सकता है।
यह निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने दिए। दरअसल, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारियों की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी के तहत 50 लाख से ज्यादा आपत्तियों की जांच करनी है। मौजूदा समयसीमा में यह काम चुनौतीपूर्ण दिख रहा है।
हाई कोर्ट ने आकलन किया कि 250 न्यायिक अधिकारी भी जांच पूरी करने में करीब 80 दिन ले सकते हैं। इसलिए अदालत ने अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत मानी। राज्य सरकार ने इस फैसले को सकारात्मक कदम बताया। सरकार ने कहा कि इससे सत्यापन प्रक्रिया तेज होगी।
अब केंद्रीय बलों की तैनाती का मुद्दा और मतदाता सूची की जांच साथ-साथ चर्चा में हैं। भाजपा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। वहीं राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया पर भरोसा जता रही है। इसी बीच न्यायपालिका निगरानी बनाए हुए है। चुनाव नजदीक आते ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बहस और तेज हो रही है।