अदालत ने कहा– IYC प्रमुख ने पर्दे के पीछे से किया प्रदर्शन का संचालन, चार दिन की पुलिस हिरासत

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नई दिल्ली – राजधानी की एक अदालत ने मंगलवार को इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। मामला पिछले सप्ताह एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए शर्टलेस प्रदर्शन से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि आरोपी ने पर्दे के पीछे से प्रदर्शन की निगरानी की।

पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने यह आदेश दिया। अदालत ने सह-आरोपियों के खुलासों और गिरफ्तारी मेमो का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि आरोपी ने निर्देश दिए और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी।

अदालत ने साफ किया कि केवल मौके पर मौजूद न रहने से किसी की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। अदालत ने कहा कि कानून साजिश और उकसावे को दूरी से भी संभव मानता है। इसलिए शारीरिक उपस्थिति की अनुपस्थिति आरोपी को स्वतः राहत नहीं देती।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने दलील दी कि आरोपी ने प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने कहा कि आरोपी ने अन्य आरोपियों को निर्देश दिए और पूरे प्लान पर करीबी नजर रखी। उन्होंने यह भी बताया कि सह-आरोपी श्रीकृष्ण हरि लगातार घटनाक्रम की जानकारी देता रहा।

दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकील संजय घोष ने हिरासत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी मौके पर मौजूद नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी को प्रदर्शन में पहनी गई टी-शर्ट्स की जानकारी नहीं थी। हालांकि अदालत ने इस दलील को इस स्तर पर स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने टी-शर्ट्स की बरामदगी को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि इन टी-शर्ट्स पर खास नारे लिखे थे। ये नारे प्रदर्शन की पहचान और संदेश का हिस्सा बने। इसलिए अदालत ने बरामदगी को मामूली नहीं माना।

इसके अलावा, अदालत ने मोबाइल डेटा को अहम बताया। अदालत ने कहा कि फोन की जानकारी से बड़ी साजिश का खुलासा हो सकता है। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने फोन का पासवर्ड साझा करने से इनकार किया। जांच एजेंसियां मानती हैं कि फोन में सह-आरोपियों से बातचीत के सुराग मिल सकते हैं।

हालांकि अदालत ने सात दिन की पुलिस हिरासत की मांग को ज्यादा माना। अदालत ने कहा कि पुलिस मौके की जांच पहले ही काफी हद तक कर चुकी है। इसलिए अदालत ने चार दिन की हिरासत दी। साथ ही अदालत ने आरोपी को अपने वकील से मिलने की अनुमति भी दी, बशर्ते जांच प्रभावित न हो।

इसी बीच, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(1) और 192 के तहत दंगे और उकसावे से जुड़े आरोप भी जोड़े। विशेष आयुक्त (अपराध) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि जांच में ठोस साक्ष्य मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कृत्य गहरी साजिश का हिस्सा है।

अब मामले की जांच अहम चरण में पहुंच गई है। पुलिस हिरासत के दौरान पूछताछ से आगे के तथ्य सामने आ सकते हैं।


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