पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने मुर्शिदाबाद से दो लोगों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने बताया कि दोनों अवैध ओटीपी शेयरिंग रैकेट चला रहे थे। जांच में संभावित सीमा-पार लिंक सामने आए। इससे डिजिटल सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी।
आरोपियों की पहचान जुहाब और सुमन के रूप में हुई। जांचकर्ताओं के अनुसार, दोनों पाकिस्तान और बांग्लादेश में बैठे हैंडलरों को ओटीपी और सिम से जुड़ी डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराते थे। बदले में वे पैसे लेते थे। इस तरह वे विदेशी तत्वों को भारतीय मोबाइल नंबर और ऑनलाइन खातों तक पहुंच दिलाते थे।
जांच 10 फरवरी से शुरू हुई। एसटीएफ को खुफिया सूचना मिली। इसके बाद टीम ने मुर्शिदाबाद में छापेमारी कर जुहाब को पकड़ा। पूछताछ के दौरान अधिकारियों को उसके साथी सुमन का सुराग मिला। पुलिस ने 22 फरवरी को सुमन को भी गिरफ्तार किया। फिर उसे बिधाननगर की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। वे ओटीपी को तीसरे पक्ष को बेचते थे। इस प्रक्रिया से ऑनलाइन अकाउंट और मोबाइल सेवाओं तक अनधिकृत पहुंच मिलती थी। जांच में सामने आया कि आरोपी सिम कार्ड खरीदते थे, मोबाइल नंबर सक्रिय करते थे और फिर उनका नियंत्रण विदेशी हैंडलरों को सौंप देते थे।
जांच एजेंसियां अब विदेशी कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से निर्देश मिलते थे। आरोपी उन्हीं निर्देशों के आधार पर सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल अकाउंट बनाते थे। इस नेटवर्क के जरिए भारत के भीतर रहकर विदेशी संचालक ऑनलाइन गतिविधियां चला सकते थे।
अधिकारियों को आशंका है कि इस तरह की पहुंच पहचान चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो सकती थी। साथ ही, फर्जी भारतीय डिजिटल पहचान भी बनाई जा सकती थी। इसलिए जांच टीम ने संचार सुरक्षा और आव्रजन से जुड़े कानूनी प्रावधान लागू किए। अधिकारियों को शक है कि अवैध डिजिटल पहचान का इस्तेमाल विदेशी नागरिकों के गैरकानूनी प्रवेश या ठहराव में हो सकता है।
इस बीच, यह गिरफ्तारी व्यापक आतंकी जांच के दौर में हुई। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक कथित आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया। जांच में लश्कर-ए-तैयबा और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस से जुड़े संकेत मिले। उस मामले में पुलिस ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से आठ लोगों को पकड़ा। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि कुछ आरोपी फर्जी आधार पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस को मोबाइल फोन से कई भारतीय शहरों के रेकी वीडियो भी मिले।
इसी पृष्ठभूमि में मुर्शिदाबाद का ओटीपी गिरोह जांच एजेंसियों के लिए अहम कड़ी बन गया है। एसटीएफ लगातार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारी वित्तीय लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। वे पूरे नेटवर्क और संभावित संपर्कों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि ओटीपी जैसे छोटे डिजिटल कोड भी बड़े अपराध या आतंकी गतिविधियों का आधार बन सकते हैं। इसलिए अधिकारी लोगों से सतर्क रहने और निजी जानकारी साझा न करने की अपील कर रहे हैं। जांच अभी जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की दिशा में काम कर रही है।