गहलोत सरकार के सभी मंत्रियों के इस्तीफे, रविवार शाम 4 बजे होगा शपथ ग्रहण

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जयपुर, 20 नवंबर (हि.स.)। गहलोत सरकार में शामिल सभी मंत्रियों ने शनिवार को अपने इस्तीफे सौंप दिए। इसी के साथ मंत्रिमंडल पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। अब रविवार शाम चार बजे राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा, जिसमें गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री निवास पर शनिवार शाम हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रस्ताव रखा। उसके बाद सभी ने अपने पदों से इस्तीफे लिखकर मुख्यमंत्री को सौंप दिए। मंत्रिमंडल की इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी महासचिव अजय माकन भी मौजूद रहे।

बैठक खत्म होने के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बताया कि सभी को रविवार दो बजे प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय बुलाया गया है। वहीं तय होगा कि किन-किन को शपथ लेने के लिए राजभवन जाना है। खाचरियावास ने बताया कि मंत्रिमंडल से इस्तीफा एक सतत प्रक्रिया के तहत लिए गए है, ताकि मुख्यमंत्री अपने हिसाब से मंत्रिमंडल का पुनर्गठन कर सके। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्यपाल से मिलने राजभवन कब जाएंगे इसे लेकर अभी संशय है।

कांग्रेस हाईकमान ने गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल फेरबदल को मंजूरी देते हुए फॉर्मूला तय कर दिया है। फेरबदल 2023 के चुनावी फायदे को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। फेरबदल में गोविंद सिंह डोटासरा, हरीश चौधरी और रघु शर्मा की जगह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की संभावना है। इसमें दो जाट और एक ब्राह्मण चेहरे को मौका मिल सकता है। डोटासरा और हरीश चौधरी की जगह जाट चेहरों के तौर पर रामलाल जाट, बृजेंद्र सिंह ओला, हेमाराम चौधरी, नरेंद्र बुडानिया के नाम चर्चा में हैं। निर्दलीय महादेव सिंह खंडेला का नाम भी दावेदारों में है। रघु शर्मा की जगह राजेंद्र पारीक, महेश जोशी, राजकुमार शर्मा दावेदार हैं। हेमाराम, रामलाल जाट और ओला पहले भी गहलोत के साथ मंत्री रह चुके हैं। महेश जोशी गहलोत के शुरू से ही बहुत नजदीक माने जाते हैं और अभी सरकारी मुख्य सचेतक हैं।

बसपा से कांग्रेस में आने वालों में राजेंद्र सिंह गुढ़ा का नाम प्रमुख हैं। बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले छह विधायक ही दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन बाकी पांच को संसदीय सचिव बनाकर या राजनीतिक नियुक्तियां देकर संतुष्ट किया जा सकता है। निर्दलीयों में महादेव सिंह खंडेला और संयम लोढ़ा के नाम चर्चा में हैं। मास्टर भंवरलाल मेघवाल के निधन के बाद गहलोत सरकार में कोई दलित कैबिनेट मंत्री नहीं है। मास्टर भंवरलाल मेघवाल की जगह मंजू मेघवाल को मंत्री बनाया जा सकता है। दलित वर्ग से खिलाड़ी लाल बैरवा, परसराम मोरदिया, अशोक बैरवा, गोविंद मेघवाल भी दावेदार हैं। अशोक बैरवा गहलोत के पिछले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं। गोविंद मेघवाल वसुंधरा राजे के पहले कार्यकाल में संसदीय सचिव रह चुके हैं, बाद में वे बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आ गए।

आदिवासी चेहरों के तौर पर दयाराम परमार, महेंद्रजीत मालवीय के नाम दावेदारों में हैं। मालवीय पहले भी मंत्री रह चुके हैं। मालवीय की पत्नी जिला प्रमुख हैं। अल्पसंख्यक वर्ग से अमीन खान, जाहिदा के नाम प्रमुख दावेदारों में हैं। गुर्जर चेहरों के तौर पर शकुंतला रावत, डॉ. जितेंद्र सिंह और राजेंद्र सिंह बिधूड़ी के नाम चर्चा में हैं। कांग्रेस की अंदरूनी सियासत के लिहाज से गुर्जर चेहरों को मौका मिलने की पूरी संभावना है। नहरी क्षेत्र से गुरमीत सिंह कुन्नर को मौका मिल सकता है। जाहिदा खान पहले संसदीय सचिव रह चुकी हैं। डॉ. जितेंद्र गहलोत के पिछले कार्यकाल में ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं।

गहलोत सरकार में 13 जिलों से फिलहाल कोई मंत्री नहीं है। उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, भीलवाड़ा, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, सिरोही, धौलपुर, टोंक, सवाई माधोपुर और करौली जिलों से अभी एक भी मंत्री नहीं है। इन जिलों से मंत्रिमंडल में जगह दी जानी है। सचिन पायलट कैंप से करीब 4 से 5 मंत्री बनने की संभावना है। पायलट कैंप से मुरारीलाल मीणा, दीपेंद्र सिंह शेखावत, बृजेंद्र सिंह ओला, हेमाराम चौधरी, रमेश मीणा में से मंत्री बनने की संभावना है।


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