आमिरखानः पटाखेबाजी और अजान

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक

प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता आमिर खान दिवाली पर पटाखेबाजी के विरुद्ध किसी टायर कंपनी की पहल पर टीवी चैनलों पर विज्ञापन दे रहे हैं। उसमें वे देश के करोड़ों लोगों से अनुरोध कर रहे हैं कि दिवाली के मौके पर वे सड़कों पर पटाखेबाजी न करें। अंधाधुंध पटाखेबाजी से सड़कों पर यातायात में तो बाधा पड़ती ही है, प्रदूषण भी फैलता है और विस्फोटों से लोग भी मरते हैं। इसके अलावा पटाखों के नाम पर हम चीनी पटाखा-निर्माताओं की जेबें मोटी करते हैं। आजकल जब फिल्म-अभिनेता लोग चड्डी-बनियान और जूते-चप्पल का विज्ञापन करते हैं, तो उन्हें देखकर मुझे शर्म आती है। सिर्फ पैसा कमाने के लिए वे अपनी लोकप्रियता का सौदा करने लगते हैं। मैं तो सिनेमा नहीं के बराबर देखता हूं लेकिन फिर भी आमिर खान को थोड़ा अलग किस्म का अभिनेता मानता हूं। मैं चाहता हूं कि आमिर खान की तरह हमारे सभी अभिनेता और अभिनेत्रियां ऐसे विज्ञापनों में भाग लें, जो आम लोगों को समाज-सुधार के लिए प्रेरित करें। इससे अपराध घटेंगे और सरकार का भार भी हल्का होगा। लेकिन आमिर खान ने जो मांग की है, उसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। कर्नाटक के भाजपा सांसद अनंत हेगड़े की यह मांग भी बिल्कुल उचित है कि मस्जिदों में लाउडस्पीकरों से होनेवाली शोर-शराबेवाली अजान के विरुद्ध भी आवाज उठनी चाहिए। मैं कहता हूं कि जैसे सीएट टायर के हिंदू मालिक ने दीपावली के पटाखों के विरुद्ध पहल की, कोई मुस्लिम सेठ आगे आए और वह चिल्लपों अजान के विरुद्ध पहल करे। स्वयं आमिर खान इसका बीड़ा उठायें। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले से ही अजान के शोर की सीमा बांध रखी है और रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकरों पर प्रतिबंध लगा रखा है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। वहां पिछले हफ्ते ही कई तरह के प्रतिबंधों की घोषणा हुई है। मैं खुद लगभग 15-20 मुस्लिम देशों में रहा हूं। एकाध जगह को छोड़कर नमाज या अजान के नाम पर मैंने शोर-शराबा कभी नहीं सुना। 52 साल पहले अफगानिस्तान के हेरात शहर में मैंने मिस्री कुरान की मधुर आयतें सुनीं तो मैं दंग रह गया। किसी भी धर्मग्रंथ में नहीं लिखा है कि उसके मंत्र या वर्स या आयतें या वाणी आप कानफोड़ू ढंग से पढ़ें। अपना भजन कानफोड़ू ढंग से सुनने पर सामनेवाले के दिल में क्या प्रतिक्रिया होती है, इसका हम ध्यान करते हैं या नहीं ? ईश्वर या अल्लाह अगर सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापक है तो उसे आपके घंटे और घड़ियाल की जरुरत क्यों होनी चाहिए? इस मामले में संत कबीर ने मूर्तिपूजकों की तगड़ी खबर ली है तो उन्होंने शोरपसंद मुसलमानों को भी नहीं बख्शा है। वे कहते हैं—

कांकर-पाथर जोड़ि के मस्जिद लई चुनाय ।

ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, बहरा हुआ खुदाय ।।

(लेखक सुप्रसिद्ध पत्रकार हैं)


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