योगा को स्कूलों में नहीं किया जा सकता अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली, 23 जुलाई (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी और सीबीएसई की कक्षा एक से कक्षा आठ तक की किताबों में योग और हेल्थ एजुकेशन से जुड़े टेक्स्टबुक मुहैया कराने की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।
भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर याचिका में मांग की थी कि स्वास्थ्य का अधिकार योग और हेल्थ एजुकेशन दिए बिना संभव नहीं है। याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी कि वो केंद्र सरकार को निर्देश दे कि वो राष्ट्रीय योग नीति बनाए। याचिका में एनसीईआरटी और सीबीएसई के कक्षा एक से कक्षा आठ तक की किताबों में योग और हेल्थ एजुकेशन से जुड़े टेक्स्टबुक मुहैया कराए जाएं।
याचिका में कहा गया था कि कोरोना संकट के दौरान लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक मानक योगा प्रोटोकॉल विकसित करने के लिए आयुष मंत्रालय को निर्देश दिया जाएं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय को ये निर्देश दिया जाए कि वो कोरोना से संबंधित योगा प्रोटोकॉल का प्रसारण करें ताकि लोगों में जागरुकता आ सके। याचिका में कहा था कि संविधान की धारा 21 के तहत स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक अधिकारों की सूची में आता है। इसलिए हर व्यक्ति को स्वस्थ रहने का अधिकार है। राज्य का भी ये कर्तव्य है कि वो नागरिकों खासकर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति खास ध्यान दे।

 


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