दिल्ली विवि के 12 कॉलेजों के लिए 18.75 करोड़ रुपये की ग्रांट रिलीज, अध्यापकों ने बताया नाकाफी

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नई दिल्ली, 08 मई (हि.स.) । दिल्ली सरकार ने दिल्ली विश्ववविद्यालय से सम्बद्ध 12 कॉलेजों के लिए 18 करोड़ 75 लाख रुपये की ग्रांट रिलीज की है, लेकिन अध्यापकों में कोई खुशी नहीं है। क्योंकि अधिकांश कॉलेजों के शिक्षकों को मार्च-अप्रैल महीने का वेतन नहीं मिला है। इन कॉलेजों में 50 से 60 फीसदी तदर्थ एवं गेस्ट टीचर और संविदा कर्मचारी हैं।
श्री अरविंदो कॉलेज के प्राध्यापक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली सरकार के कॉलेजों के शिक्षक एवं कर्मचारी लॉकडाउन के चलते आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। शिक्षक और कर्मचारियों में ज्यादातर लोग किराए के मकानों में रहते हैं, अपनी ईएमआई, गाड़ी की क़िस्त आदि समय पर न भरने की वजह से तनाव में हैं। पिछले कई महीनों में इन कॉलेजों की ग्रांट रिलीज कराने की मांग को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने विधानसभा के सामने कई बार धरना-प्रदर्शन किया और हाल ही में डूटा के आह्वान पर 28 अप्रैल को भी शिक्षकों ने घरों में रहकर भूख हड़ताल की थी। यही कारण है कि दिल्ली सरकार ने शिक्षकों के आक्रोश को देखते हुए ग्रांट रिलीज की।
आर्यभट्ट कॉलेज के प्रो. केपी सिंह का कहना है कि लॉकडाउन में शिक्षक छात्रों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। उन्हें अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं फिर भी सरकार उन्हें समय पर ग्रांट रिलीज नहीं करती। उनके साथ सौतेला व्यवहार कब तक?
आर्यभट्ट कॉलेज के डॉ. विनय कुमार ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा दी गई यह ग्रांट राशि पर्याप्त नहीं है। इससे पहले भी जो राशि दिल्ली सरकार ने कॉलेजों को दी थी उसमें फरवरी/मार्च का वेतन ही शिक्षक एवं कर्मचारियों को दिया गया। मार्च के बाद नए बजट सत्र में कॉलेजों को और ग्रांट रिलीज करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन हाल ही में जो ग्रांट रिलीज हुई है उससे एक महीने का वेतन भी संभव नहीं है। उनका कहना है कि यह ग्रांट ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। अध्यापकों ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार एक साथ 4 या 6 महीने की ग्रांट क्यों नहीं रिलीज करती? इस समय कोरोना महामारी फैली हुई है और शिक्षकों पर आर्थिक संकट छाया है फिर भी सरकार समय पर सभी को पूरा वेतन नहीं दे रही है।

 


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