हार्वर्ड और येल यूनिवर्सिटीज़ के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू

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लॉस एंजेल्स 13 फ़रवरी (हिस): दुनिया में शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ ‘हार्वर्ड’ और  ‘येल’ यूनिवर्सिटी को पिछले वर्षों में  चीन और सऊदी अरब से मिली क़रीब साढे छह अरब डॉलर की सहायता राशि की जांच शुरू हो गई है। जांच कार्य एजुकेशन विभाग कर रहा है। वाल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, आईवी लीग शिक्षण संस्थानों की जांच अपने आप में एक गंभीर मामला रहा है। इसे यूनिवर्सिटी और विभिन्न सरकारी विभागों में तालमेल की कमी बताया जा रहा है। इन शिक्षा संस्थानों में भारत से भी बड़ी तादाद में छात्र पढ़ने आते हैं।
वाल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, हार्वर्ड और येल, दोनों ही यूनिवर्सिटी ने कहा है कि वे जो भी काम करते हैं, शिक्षा विभाग के निर्धारित मानदंडों के अनुरूप होता है। जबकि शिक्षा विभाग का कहना है कि अमेरिका में उच्च शिक्षण संस्थान विदेशी मदद से अरबों, खरबों डॉलर में खेल रहे हैं। इन शिक्षण संस्थानों को विदेशी मदद का ख़ुलासा करना चाहिए। इन संस्थानों को प्रति वर्ष बतौर उपहार  ढाई लाख डॉलर मिलते हैं। शिक्षा विभाग ने आरोप लगाया है कि ये शिक्षण संस्थान अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए शोध के नाम पर विदेशी सरकारों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, जैसे चीन की हआए टेक्नोलाजी कंपनी और ज़ेड टीई कॉरपोरेशन और रूस की एक कंपनी कासपेरसकी  से चंदे की मोटी रक़म हासिल करते हैं।
चीन के अधिकारी अपने स्वार्थवश अकेडिमिक लोगों पर नजरें रखते हैं और सरकारी कार्यक्रमों के अधीन टेलेंट रिक्रूटमेंट कार्यक्रमों जैसे  ‘थाउजेंड टेलेंट प्लान ‘ में अपना हस्तक्षेप करने की कोशिश में रहते हैं। पिछले महीने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में रसायन विभाग के चेयरमैन को हिरासत में लिया गया था। कहा गया है कि जब अमेरिकी सरकार ने शोध कार्य पर एक निर्धारित रक़म की सुविधाएं दी थी, तब उन्हें चीनी फ़ंड लेने की क्या ज़रूरत थी। शिक्षा विभाग ने मंगलवार को ही एक पत्र जारी कर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है कि उसे चीन, क़तर, रूस, सऊदी अरब और ईरान से कितना डोनेशन मिला है।

 


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