वाशिंगटन पोस्ट ने बगदादी को बताया ‘आत्मसंयमी धार्मिक नेता’, हुई किरकिरी

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अखबार ने इस कुख्यात आतंकी सरगना के मरने के बाद उसकी जीवनी को इस शीर्षक से प्रकाशित किया- ‘आत्मसंयमी धार्मिक नेता बग़दादी, 48 वर्ष की आयु में मारा गया।’



नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (हि.स.)। अमेरिका के प्रमुख समाचारपत्र ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने इस्लामिक स्टेट के सरगना को पहले ‘आत्मसंयमी धार्मिक नेता’ का खिताब दिया और बाद में इसके लिए पाठकों से माफी मांगी।

अखबार ने इस कुख्यात आतंकी सरगना के मरने के बाद उसकी जीवनी को इस शीर्षक से प्रकाशित किया- ‘आत्मसंयमी धार्मिक नेता बग़दादी, 48 वर्ष की आयु में मारा गया।’ इस आलेख के बाद भारत सहित दुनिया भर के लोगों ने अखबार के सम्पादक को खरी-खोटी सुनाना शुरू किया, जिसके बाद अखबार ने नया शीर्षक दिया- ‘इस्लामिक स्टेट का उग्रवादी नेता मारा गया।’

अमेरिकी अखबार के इस कृत्य की भारत में व्यापक प्रतिक्रिया हुई। बग़दादी को धार्मिक नेता के रूप में प्रचारित करने के लिए सोशल मीडिया पर अमेरिकी प्रेस को निशाना बनाया गया। ट्विटर पर ‘मौत सूचना’ शीर्षक के साथ यह ट्रेंड होने लगा।

ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने कुख्यात रहे लोगों की जीवनी पर नए-नए शीर्षक गढ़े। एक व्यक्ति ने लिखा कि फिल्म शोले का गब्बर सिंह ‘प्रकृति उपासक और नृत्य-संगीत प्रेमी था।’ इसी तरह हिटलर, ओसामा बिन लादेन और पाकिस्तानी  आतंकवादियों के लिए अच्छे विशेषणों का उल्लेख कर वशिंगटन पोस्ट का मजाक उड़ाया गया।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के बारे में लिखा, ‘बहुसंख्यक समुदाय के अधिकारों का रक्षक नाथूराम गोडसे, 39 वर्ष की आयु में हमेशा के लिए सो गया।’

वास्तव में भारत में सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग जम्मू कश्मीर के बारे में पश्चिमी मीडिया की एकतरफा और गलत रिपोर्टिंग को लेकर बहुत क्षुब्ध रहे हैं। वाशिंगटन पोस्ट के इस कृत्य से उन्हें अपना गुस्सा निकालने का मौका मिल गया।

 


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