जेएनयू : रोमिला थापर से कार्य अनुभव का विवरण मांगने पर विवाद

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प्रो. रोमिला थापर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस हैं। उन्हें वर्ष 1993 में प्रोफेसर एमेरिटस नामित किया गया था।



नई दिल्ली, 01 सितम्बर (हि.स.)। विख्यात इतिहासकार प्रो. रोमिला थापर से उनकी शैक्षणिक योग्यता एवं कार्य अनुभव के संबंध में जानकारी मांगे जाने का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने विरोध किया है और प्रशासन से माफी भी मांगने की बात कही है।

शिक्षक संघ ने रविवार को कहा कि जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने गत माह थापर को पत्र भेजकर उनसे सीवी जमा करने को कहा था। पत्र में लिखा था कि 87 वर्षीय प्रो. थापर के कार्यों का आंकलन कर विश्वविद्यालय की एक समिति फैसला करेगी कि उनकी सेवाएं जारी रखनी चाहिए या नहीं। प्रो. रोमिला थापर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस हैं। उन्हें वर्ष 1993 में प्रोफेसर एमेरिटस नामित किया गया था।

शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस कदम को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस पद के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षकों को ही चुना जाता है। एक बार प्रोफेसर एमेरिटस चुने जाने के बाद इस पद पर शिक्षक जीवन भर बना रहता है। ऐसे में उनसे सीवी मांगना सरासर अनुचित है।

शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए प्रो. थापर की सेवाएं अग्रसरित करने के साथ ही इस संबंध में एक व्यक्तिगत माफीनामा जारी करने की मांग की है। शिक्षक संघ का मानना है कि यह विवाद जानबूझकर उन्हें बेइज्जत करने के लिए खड़ा किया गया है।

उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर एमेरिटस को विश्वविद्यालय कोई वेतन या भत्ता आदि नहीं देता है। विश्वविद्यालय में अकादमिक कार्यों और शोधार्थियों की मदद के लिए संबंधित सेंटर में एक कमरा दिया जाता है।

 


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