राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के डर से गुजरात कांग्रेस के विधायक राजस्थान शिफ्ट

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वर्कशॉप के नाम पर इन विधायकों को राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित अम्बाजी तीर्थस्थल पहुंचाने की योजना है। इन विधायकों को चुनाव तक वहीं ठहराया जाएगा



अहमदाबाद/सिरोही, 03 जुलाई (हि.स.)। गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों के लिए पांच जुलाई को होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। इस कारण पार्टी ने अपने विधायकों को दो दिन के लिए राजस्थान शिफ्ट कर दिया है।
वर्कशॉप के नाम पर इन विधायकों को राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित अम्बाजी तीर्थस्थल पहुंचाने की योजना है। इन विधायकों को चुनाव तक वहीं ठहराया जाएगा। सूत्रों का कहना कि बुधवार देर रात तक पार्टी के 71 में से 69 विधायक वहां पहुंच जाएंगे।
इसके पहले इन विधायकों को माउंट आबू भेजने की योजना थी। माउंटआबू के अचलगढ़ क्षेत्र में एक निजी होटल बुक भी कर दिया गया था। गुजरात कांग्रेस के नेता अश्विन कोतवाल ने इसकी पुष्टि की थी, लेकिन बदले हालात में पार्टी ने अपनी रणनीति बदल दी। भाजपा नेताओं और कांग्रेस के बागी विधायक अल्पेश ठाकोर के आरोपों से घबराकर कांग्रेस ने अपने विधायकों को अम्बाजी में ठहराने का फैसला किया। इसके बाद सभी विधायकों को मतदान के दिन यानी पांच जुलाई को सुबह आठ बजे सीधे गुजरात विधानसभा लाया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक गुजरात राज्यसभा चुनाव की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंपी गयी है। गहलोत ने गुजरात प्रभारी राजीव सातव से चर्चा भी की है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं स्मृति ईरानी के लोकसभा चुनाव जीतने और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के कारण ये सीटें खाली हुई हैं। भाजपा ने दो सीटों के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष जुगल ठाकोर को उम्मीदवार बनाया है।
वर्ष 2017 में सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल जब राज्यसभा के लिए चुनाव लड़़ रहे थे उस वक्त कांग्रेस को अपने 44 विधायकों को कर्नाटक भेजना पड़ा था।
क्या है चुनावी गणित
182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के 71 विधायक हैं। जबकि सत्तारूढ़ भाजपा के विधायकों की संख्या 100 है। एनसीपी एक, निर्दलीय एक और बीपीपी के दो विधायक हैं। जबकि चार सीटें खाली हैं। यानी सदन की प्रभावी संख्या 178 है। राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 60 वोट चाहिए। कांग्रेस के 71 में से सिर्फ 69 विधायक ही उसके साथ हैं।

 


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