हीरो पायलट, मुंह में दही और साजिशी थ्योरी की बाढ़

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मधुरेन्द्र सिन्हा
नई दिल्ली, 05, अक्टूबर l इस समय चारों ओर उस भारतीय पायलट की चर्चा है जिसने बुरी तरह से जख्मी होने के बावजूद प्लेन को हाईजैक और अंततः क्रैश होने से बचाया। इस क्रम में उसने 174 यात्रियों और क्रू की जान बचा ली। उसके सहयोगी ओमानी पायलट ने विमान को क्रैश कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और भारतीय पायलट स्मित मच्छर को प्लेन की कुल्हाड़ी से बुरी तरह से घायल कर दिया। फिर भी स्मित ने फर्श पर गिरने के बावजूद प्लेन के कॉकपिट का दरवाजा किसी तरह से खोल दिया और मदद की गुहार लगाई जिसके बाद कुछ यात्रियों ने हमलावर पायलट को पकड़ा, विमान को संभाला और फिर स्मित को बाहर निकाला। नतीजतन विमान न केवल क्रैश होने से बच गया बल्कि कीमती जिंदगियां बच गईं। बाद में पता चला कि वह पायलट हिन्दू है और को पायलट ओमानी मुस्लिम। ऐसे में यह मामला जेहाद का दिखता है और कई देशों ने इसे ऐसा ही माना है। लेकिन भारत में आपिये, लिब्रल, क्मयुनिस्टा वगैरह इस पर चुप हैं। राहुल गांधी को इसकी जानकारी तो मिल गई लेकिन उनके मुंह में दही जम गया। जाहिर है उनकी पार्टी के बेलचे भी कन्नी काट गये। कारण साफ है कि उन्हें लगता है कि एक हिन्दू की प्रशंसा से उनके मुस्लिम वोटर नाराज हो जायेंगे। राहुल इस बात का बहुत ख्याल रखते हैं कि मुस्लिम वोटर उनसे छिटके नहीं। इसके लिए हिन्दुओं के पक्ष में बोलना उन्हें गंवारा नहीं है। लेकिन इसके विपरीत मौलाना ओवैसी ने उस पायलट की तारीफ की और उसके अदम्य साहस की सराहना की। समझ में नहीं आता है कि राहुल के सलाहकार कौन लोग हैं और वे ऐसी सलाह क्यों देते हैं जिससे माहौल उनके खिलाफ बनता है। यह मामला भी उनके खिलाफ गया और जनता के एक बड़े वर्ग ने उनकी खुलकर आलोचना की है। यही हाल लिबरल्स तथा कम्युनिस्टा का है जो मुसलमानों के पक्ष में खूब बोलते हैं लेकिन जाबांज हिन्दू की तारीफ में बगलें झांकने लग जाते हैं।
अब सारी दुनिया में स्मित मच्छर की तारीफ हो रही है तो दूसरी ओर ऐसे भी घटिया लोग हैं जो साजिश थ्योरी को बढ़ा रहे हैं। खाना खराब और बरफा पानम जैसी तथाकथित इन्फ्लुएंसर तो खुल के खेल रही हैं और कुछ भी बोले जा रही हैं। दूसरी ओर कुछ अन्य साजिश थ्योरी पर काम कर रहे हैं और इसे मुलमानों के विरुद्ध एक साजिश बता रहे हैं। वे कह रहे हैं कि यह स्टेज मैनेज्ड है औप मोदी तथा नेतनयाहू ने करवाया है। इसके लिए वे तरह-तरह के कुतर्क दे रहे हैं। वैसे यहां बता दूं कि पिछले एक दशक से हर मामले में साजिश थ्योरी बनाने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। मेरे एक मित्र हैं जो वीगल कुत्ते की भांति साजिश को सूंघते रहते हैं। अब इसी शनिवार को उन्होंने इस पूरे मामले में किसी का पोस्ट दिखाकर मुझसे कहा कि यह साजिश है। उस बंदे ने खूब सारे मुद्दे उठाये हैं लेकिन मुझे संदेह है कि उस कमबख्त ने कभी विमान का क़ॉकपिट अंदर से देखा भी होगा और उसे विमान उड़ाने के नियमों की भी जानकारी भी होगी। मैंने दो बार कॉकपिट के अंदर जाकर सारा कुछ समझा है। पहली बार एयरफोर्स के विमान से नागालैंड जाते वक्त स्क्वाड्रन लीडर नायडू ने मेरे साथ दो और पत्रकारों को तेजपुर में कॉकपिट के अंदर की पूरी कार्यप्रणाली बताई। इसके बाद 1996 में मैं और आठ अन्य पत्रकार सिंगापुर एयरलाइंस के बुलावे पर सिंगापुर गये थे जहां पायलट की ट्रेनिंग से लेकर अंदर तक की कार्यप्रणाली को समझा। लेकिन इस समय साजिश थ्योरी वाले अपना अधकचरा ज्ञान पेले जा रहे हैं। एक ने तो लिखा है कि गिरे होने के बावजूद उसने दरवाजा कैसे खोल दिया तो दूसरे ने लिखा कि ऑक्सीजन पाइप लगे होने के बावजूद वह बात कैसे कर पा रहा है? इन जाहिलों को यह पता भी नहीं है कि पायलटों को आपात स्थिति के लिए अच्छी तरह ट्रेन किया जाता है। 9/11 के बाद उन्हें कई तरह की आपात स्थिति के लिए तैयार किया जाता है। जहां तक ऑक्सीजन पाइप लगे होने के बावजूद स्मित के बोलने की बात है तो इसमें कोई हैरानी नहीं है। मेरा छोटा भाई जो अमर उजाला समाचार पत्र में था, बीमार होकर मरणासन्न हो गया तो उसे ऑक्सीजन मशीन से लगातार ऑक्सीजन दिया जाता था। अपने निधन के ठीक दो दिन पहले तक वह मुझसे बात करता रहा जबकि ऑक्सीजन पाइप उसकी नाक में लगी रहती थी। ऐसे उटपटांग कुतर्क वाली साजिशी थ्योरी हवा में हैं। इनका कोई सिर-पैर नहीं है।
मित्रों मेरे कई मुस्लिम दोस्त हैं जिनके घर मेरा आना-जाना है और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस देश का मुसलमान देश से प्यार करता है और चाहता है कि वह शांति और भाईचारा से रहे। कुछ अपवाद हो सकते हैं लेकिन उनका प्रवक्ता बनने की कोशिश करना जाहिलाना काम है। अगर उनके खिलाफ आरएसएस या ऐसे संगठनों ने प्रचार किया है तो कांग्रेस, सपा, आरजेडी, उध्दव शिव सेना वगैरह भी यही काम कर रहे हैं। उनके पक्ष में खुद ऐसे बयान देकर जिससे उनका कोई ताल्लुक नहीं है। उनके तुष्टिकरण के नाम पर लोगों के दिमाग में ज़हर भरने की जरूरत नहीं है। जो जैसा है वह ठीक है।
स्मित मच्छर ने दिखाया कि मानवता और बहादुरी का कोई धर्म नहीं होता है। किसी भी धर्म को मामने वाला ऐसा कारनामा कर सकता है। इसमें कोई ऐंगल ढूंढने की जरूरत नहीं है। जान पर खेलने वाले उस बहादुर इंसान के जज्बे को मेरा सलाम।


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