कोयले का आयात नहीं बढ़ना पर्यावरण के लिए सकारात्मक कदम: पीयूष गोयाल

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नई दिल्ली (हि.स.)। रेलवे और कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को आर्थिक नीति अनुसंधान केंद्र (सीईपीआर) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में आर्थिक प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि इसके साथ बिजली, स्टील और सीमेंट में भी खपत बढ़ी लेकिन पर्यावरण के मद्देनजर कोयले का आयात नहीं बढ़ने दिया गया।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हमने कोयले की क्वालिटी पर भी विशेष ध्यान दिया है। पहले कोयले में पत्थर आया करते थे, हमने इस पर पूरी लगाम लगाई, सख्त निगरानी करके अच्छी क्वालिटी मिले, इसके लिए थर्ड पार्टी सैंपलिंग से वेरिफाई कराया। गोयल ने कहा कि हमारा मानना था कि क्वालिटी अच्छी मिलेगी तो पॉवर प्लांट डैमेज नहीं होंगे, इससे एफिशिएंसी भी बढ़ी और रखरखाव के खर्चे के साथ ही प्रदूषण भी कम हुआ।
गोयल ने कहा कि हमारी सरकार आने से पहले नाल्को को आदेश दिया गया था कि अपना विस्तार मत करो क्योंकि हमारे पास कोयले की कमी है। इस कारण आपको कोयला नहीं मिलेगा तो आपकी प्रोडक्शन कॉस्ट बड़ेगी। ईरान में नाल्को को विस्तार करने को कहा गया और यहां से एलुमिना ईरान भेजकर एलुमिनियम बने। इस निर्णय को हमने बदला, भारत का एलुमिना भारत में ही इस्तेमाल होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि बिना भ्रष्टाचार के और अधिक प्रोडक्टिविटी और अधिक आउटपुट के साथ कोयला दिलाने में हम प्रयासरत रहेंगे और सफलता भी प्राप्त करेंगे।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि बिजली उत्पादन में कोयले का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अलावा फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट, एलुमिनियम में भी कोयले की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के बाद देश में लगभग दो करोड़ घर रह गए हैं, जिनके पास गैस नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तेजी से कार्य चल रहा है उसे देखते हुए लगता है कि यह काम भी शीघ्र ही पूरा हो जाएगा।
पीयूष गोयल ने कहा कि आजादी के बाद से 2014 तक लगभग 13 करोड़ एलपीजी कनेक्शन इस देश में लगे हैं, हमारे चार साल में ही 12 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं। जो भी काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने हाथ में लेते हैं, उसमे स्पीड, स्किल और स्केल होता है, उज्ज्वला हो या कोयला हो आपको इसमे स्पीड, स्किल, और स्केल देखने को मिलेगा।


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